बेंगलुरू/नई दिल्ली: कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाने पर फिर से विवाद शुरू हो गया है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि वे टीपू सुल्तान की जयंती मनाने का विरोध जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान से जुड़े किसी भी सेलिब्रेशन का जनता समर्थन नहीं कर रही है. लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए राज्य सरकार को टीपू सुल्तान की जयंती मनाने से कार्यक्रम को रद्द कर देना चाहिए. राज्य सरकार टीपू सुल्तान की जयंती मनाकर मुस्लिम समाज के लोगों को संतुष्ट करना चाहती है.

बेल्लारी लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार हुई है. राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि जनार्दन रेड्डी पर लगे गंभीर आरोपों की वजह से बीजेपी प्रत्याशी की हार हुई है. इसपर बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वे ऐसा नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई अपराधी है तो कानून अपने तरीके से अपना काम करेगी.

मालूम हो कि कर्नाटक सरकार ने 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती बनाएगी. बीजेपी का आरोप है कि ऐसे समारोहों के जरिए सरकार सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रही है. साथ ही, राज्य सरकार ने उस दिन कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी है.
मैसूर रियासत के 18वीं सदी के शासक टीपू सुल्तान के जयन्ती समारोह को 2016 से राज्य सरकार 10 नवंबर को मनाते आ रही है. उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘भाजपा टीपू जयंती मुद्दे पर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रही है. हम उन्हें ऐसा नहीं करने देंगे. कानून-व्यवस्था खराब करने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाएगा.’ उन्होंने कहा कि प्रदर्शनों के बावजूद कार्यक्रम बिना किसी हस्तक्षेप के आयोजित होगा.
गौरतलब है कि भाजपा और आरएसएस ने 10 नवंबर 2016 को समारोह आयोजित करने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए इसे ‘अल्पसंख्यक तुष्टीकरण’ करार दिया था. इस बीच, केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने राज्य सरकार से कार्यक्रम के निमंत्रण पत्र पर उनका नाम शामिल नहीं करने का आग्रह किया.

हालांकि, परमेश्वर ने कहा कि हेगड़े का नाम पहले ही शामिल किया जा चुका है और अब यह उनके ऊपर है कि वह कार्यक्रम में शामिल होना चाहते हैं, या नहीं. हेगड़े ने पिछले साल भी इस तरह का आग्रह किया था. वर्ष 2016 में उन्होंने टीपू जयंती समारोह मनाने को लेकर सरकार को आड़े हाथ लिया था. उन्होंने दावा किया था कि टीपू ‘‘कन्नड़ भाषा और हिन्दू विरोधी’’ थे.