भोपाल। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज पत्रकार वार्ता में कहा कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार किसानों से अपराधियों जैसा व्यवहार करती है। फसलों के दाम मांगने पर किसानों के सीने में गोलियां उतार देती है और मोदी सरकार बर्बरतापूर्वक अन्नदाता को लहु-लुहान कर देती है। शिवराज सरकार की बर्बरता का आलम तो यह है कि वह किसानों के साथ र्दुदांत आतंकियों जैसा व्यवहार करती है और किसानों के मासूम बच्चों और किसानों को गोलियां मारकर मौत के घाट उतार देती है। इतना ही नहीं गोली मारने वालों को गले लगाती है और हत्यारों का साथ देती है।  
मध्यप्रदेश का किसान अपनी फसलों के दामों के लिये दर-दर की ठोंकरें खाता है और प्रदेश का मुखिया अपने खेतों में करोड़ों के अनार और फूल उगाता है। न उसे समर्थन मूल्य की दरकार है, न मंडियों में अपनी फसल के बिकने का इंतजार। प्रदेश में एक भी किसान ऐसा नहीं, जिसका दूध साठ रूपये लीटर बिकता हो और मुखिया का ठाठ यह है कि साठ रूपये का दूध पूरी सरकारी अकड़ से बिक जाता है। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार में किसानों के नाम की ऐसी कोई योजना नहीं है, जो भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़ी हो।  
(1)     3 अक्टूबर 2018 को मोदी सरकार द्वारा रबी सीज़न की 6 फसलों के लिए समर्थन मूल्य की घोषणा की गई और कहा गया कि किसानों को लागत का 50 प्रतिशत ऊपर दिया जा रहा है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल विपरीत है । किसानों को मुनाफा तो दूर, खेती में उनकी लागत भी बमुश्किल निकल पा रही है । सही मायने में जो मूल्यांकन स्वामीनाथन आयोग ने किया और जो राज्यों ने लागत मूल्य निकाल कर मोदी सरकार के कृषि मूल्य एवं लागत आयोग को सूचित किया, मोदी सरकार ने इन्हे नकार कर नाकाफी समर्थन मूल्य रबी सीज़न 2018-19 और रबी सीज़न 2019-20 के लिए घोषित किया। दरअसल केन्द्र की मोदी सरकार और राज्य की शिवराज सरकार किसान विरोधी है।  
मोदी सरकार ने समर्थन मूल्य देने के लिए ’लागत मूल्य‘ का निर्धारण स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर नहीं किया है, जबकि मोदी जी ने अपने घोषणापत्र में भी किसानो से इस बात का वायदा किया था। 
मोदी सरकार की ’किसान विरोधी और जमाखोर-बिचौलिए समर्थक नीति‘ का परिणाम है कि देश का किसान बर्बादी की कगार पर आ खड़ा हुआ है। मोदी सरकार ने षड़यंत्रपूर्वक बिचौलियों और जमाखोरों की मदद करने के लिए इम्पोर्ट ड्यूटी 25 प्रतिशत से घटा कर 0 प्रतिशत तक कर दी और लाखों टन अनाज सस्ती दरों पर विदेशों से मंगवा लिया, जिसका परिणाम यह हुआ कि किसानों को भारतीय बाजार में फसलों का दाम नहीं मिल सका। 
70 वर्ष के इतिहास में पहली बार किसान और खेती पर टैक्स लगाने वाली यह पहली सरकार  है। खाद पर 5 प्रतिशत जीएसटी, ट्रेक्टर/कृषि उपकरणों पर 12 प्रतिशत जीएसटी, टायर/ ट्यूब/ ट्रांसमिशन पार्ट्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी, कीटनाशक दवाइयों पर 18 प्रतिशत जीएसटी, कोल्ड स्टोरेज इक्विपमेंट्स पर 18 प्रतिशत जीएसटी। 
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी प्रायवेट बीमा कम्पनी मुनाफा बनकर रह गई। बीमा कम्पनियों को 14,828 करोड़ का मुनाफा हुआ, जबकि किसान को मुआवजे के तौर पर मिला केवल 5,650 करोड़। 
कृषि निर्यात औंधे मुँह गिरा और आयात बढ़ा । किसान मुसीबत में और माफिया की पौ बारह। यही मोदी सरकार की असली कहानी है। 
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि मोदी सरकार सत्ता में आई ही अपने मुट्ठीभर दोस्तों को लाभ पहुँचाने के लिए थी। किसानों की किस्मत में तो उसने फसलों के दाम की जगह सदा गोलियाँ, लाठियाँ और लहू लुहान भविष्य ही लिखा है।