नई दिल्ली,  सबरीमाला : केरल सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने की बात कही है, लेकिन उसने सोमवार को मंदिर खुलने पर केवल 50 साल उम्र की महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया है. इस कदम का कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ने स्वागत किया है. वैसे दोनों ही दल 10 से 50 साल की उम्र की लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध हटाने के शीर्ष अदालत के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने के राज्य की वाम मोर्चा सरकार के फैसले के खिलाफ मुखर हैं.

अधिकारियों ने कहा कि केवल उन महिलाओं को मंदिर परिसर के अंदर सुरक्षा के लिहाज से तैनात किया गया है, जिनकी आयु रजस्वला वाली नहीं है. वहीं कम उम्र की महिलाओं को नीलक्कल आधार शिविर से पांबा तक के मार्ग पर तैनात किया है, जहां श्रद्धालु पांच किलोमीटर पैदल चलकर भगवान अयप्पा के मंदिर तक दर्शन के लिए आते हैं.
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एम एम हासन ने कहा कि उन्हें सरकार के फैसले में कोई खामी नजर नहीं आई और मंदिर परिसर में कम उम्र की महिलाओं को तैनात करने से भक्त भड़क जाते. वाम मोर्चा सरकार के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करने का फैसला करने और पुनर्विचार याचिका दाखिल नहीं करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने अयप्पा भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया होता तो मौजूदा हालात नहीं बनते.
भाजपा के तिरुवनंतपुरम जिला अध्यक्ष एस सुरेश ने कहा कि परंपरा को ध्यान में रखते हुए केवल रजोनिवृत्ति आयु वाली महिलाओं को ही मंदिर में तैनात करना चाहिए. इस बारे में पुलिस महानिरीक्षक एम आर अजीत कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों की ‘पात्रता आयु’ वाली महिलाकर्मियों को पिछले कुछ समय से आधिकारिक ड्यूटी पर मंदिर में तैनात किया गया है.