नई दिल्ली,   अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक तरफ जहां साधु-संतों के सब्र का बांध टूट रहा है और उन्होंने मोदी सरकार को तुरंत इस मसले पर अध्यादेश लाने तक का अल्टीमेटम दे दिया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के भीतर राम मंदिर पर अभी तक कोई चर्चा ही नहीं हुई है.

रविवार को दिल्ली में धर्मादेश कार्यक्रम के समापन के मौके पर देशभर से आए साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्ताव पास किया, जिसमें कहा गया कि अब राम मंदिर के निर्माण को लेकर किसी प्रकार का न तो समझौता होगा और न ही कोई बातचीत होगी, बल्कि इसके लिए सरकार जल्द से जल्द अध्यादेश लेकर आए या फिर कानून बनाए. संतों के इस निर्णय के बाद सत्ताधारी बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने आजतक से कहा कि राम मंदिर का मामला पिछले आठ साल से सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए देश की जनता चाहती है इस मसले पर कानून बनाया जाए.

'पार्टी में राम मंदिर पर चर्चा नहीं'

संतों के फैसले पर जब शाहनवाज हुसैन से सवाल किया गया तो उन्होंने राम मंदिर निर्माण की मांग को संतों का अधिकार बताया. साथ ही संतों की कानून बनाने की मांग पर उन्होंने कहा कि तथ्यों को देखने के बाद सरकार को फैसला करना है कि कानून बनाना है या नहीं. हालांकि, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता होने के नाते ये बताया कि मैं पार्टी का अधिकृत प्रवक्ता हूं और राम मंदिर के निर्माण को लेकर पार्टी में अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है.

शाहनवाज हुसैन ने ये भी कहा कि राम मंदिर केस देश का सबसे पुराना मामला है और सिर्फ आरएसएस या वीएचपी ही नहीं, बल्कि देश की बहुत बड़ी आबादी चाहती है कि इस मसले पर जल्द फैसला आए.

संतों की सभा में क्या फैसला हुआ

धर्मादेश का दो दिवसीय कार्यक्रम रविवार को खत्म हुआ, जिसमें अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेन्द्र नंद सरस्वती ने राम मंदिर निर्माण की बात पर कहा कि यह कोई आग्रह नहीं बल्कि आदेश है. उन्होंने कहा कि कानून लाया जाए और चुनाव से पहले राम मंदिर के निर्माण का काम पूरा हो. अगर यह नहीं किया गया तो हमें हमारा रास्ता पता है. संतों ने कहा कि इतिहास में पहले भी बहुत कुछ हो चुका है, अब मंदिर निर्माण होकर रहेगा.

बता दें कि शाहनवाज हुसैन का यह बयान ऐसे माहौल में आया है जब बीजेपी से जुड़े कई बड़े नेता, यहां तक कि मोदी सरकार में मंत्री तक तुरंत राम मंदिर निर्माण की पुरजोर तरीके से मांग कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर भी सवाल उठा रहे हैं.