हिंदू धर्म के अनुसार पूजा-पाठ में बहुत सी सामग्री का उपयोग किया जाता है जिसमें से एक है कपूर। कपूर का प्रयोग लगभग हर पूजा में किया जाता है। इसे जलाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना में कपूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। इसलिए हर खिसी को अपने घर में रोज़ाना सुबह और शाम को संध्या वंदन के समय कपूर ज़रूर जलाना चाहिए। इसके साथ ही वास्तु शास्त्र में कपूर का महत्व बताया गया है। इसक मुताबिक इस सुबह-शाम घर में जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा कभी वास नहीं कर पाती। ज्योतिष की मानें तो कपूर जलाने से देव दोष व पितृ दोष का शमन होता है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि हमें शायद पितृ दोष है या काल सर्प दोष है। दरअसल, यह राहू और केतु का प्रभाव मात्र है। इसे दूर करने के लिए घर के वास्तु को ठीक करें। प्रतिदिन सुबह, शाम और रात्रि को तीन बार घी में भिगोया हुआ कपूर जलाएं। घर के शौचालय और बाथरूम में कपूर की 2-2 टिकियां रखें।आकस्मिक दुर्घटना का कारण राहू, केतु और शनि होते हैं। इसके अलावा हमारी तंद्रा और क्रोध भी दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसके लिए रात्रि में हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद कपूर जलाएं।

प्रतिदिन सुबह व शाम जिस घर में कपूर जलता रहता है, उस घर में किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटना और दुर्घटना नहीं होती। रात्रि में सोने से पूर्व कपूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है।घर में यदि सकारात्मक ऊर्जा और शांति का निर्माण करना है तो प्रतिदिन सुबह व शाम कपूर को घी में भिगोकर जलाएं तथा संपूर्ण घर में उसकी खुशबू फैलाएं। ऐसा करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाएगी। बुरे सपने नहीं आएंगे और घर में अमन शांति बनी रहेगी। वैज्ञानिक शोधों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इसकी सुगंध  से जीवाणु, विषाणु आदि बीमारी फैलाने वाले जीव नष्ट हो जाते हैं जिससे वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बीमारी होने का भय भी नहीं रहता।