मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 177 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में आश्चर्यजनक रूप से इंदौर जिले से एक भी उम्मीदवार के नाम पर मुहर नहीं लगाई गई है. इसमें इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांम चार भी शामिल है, जिसे भाजपा की अयोध्या के नाम से भी जाना जाता है.

इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार से महापौर मालिनी गौड़ मौजूदा विधायक है. पिछले पांच चुनावों से इस सीट पर गौड़ परिवार काबिज है. कभी कांग्रेस के वर्चस्व वाली इस सीट पर सबसे पहले अयोध्या आंदोलन के दौरान भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने सेंध लगाई थी. विजयवर्गीय ने अपने परंपरागत इलाके विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो को छोड़कर शहर के पश्चिम क्षेत्र में स्थित इस सीट पर पहली बार भगवा लहराया था.

बाबरी मस्जिद विवाद के बाद यह इलाका पूरी तरह से भाजपा का अभेद गढ़ बन गया है. इसे भाजपा की अयोध्या के रूप में पहचान मिल गई. ऐसे विधानसभा क्षेत्र के लिए भी उम्मीदवार का नहीं मिलना भाजपा की अंदरुनी राजनीति और इंदौर की सीटों को लेकर चल रही खींचतान की और संकेत कर रहा है.

परिसीमन के बाद शहरी सीट बनी 'अयोध्या'

2008 विधानसभा चुनाव के पहले हुए परिसीमन के बाद इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांम चार पूरी तरह से शहरी सीट बन गई. व्यापारिक क्षेत्र होने के अलावा यहां मुस्लिम बाहुल्य बस्तियां भी हैं, लेकिन चुनाव में सिख, मराठी, सिंधी और वैश्य मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते है. भाजपा की इन सभी गहरी पैठ है.

1993 से गौड़ परिवार का कब्जा
बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद हुए दंगों के बाद मध्य प्रदेश में सुंदरलाल पटवा सरकार को बर्खास्त कर दिया गया था. इसके बाद 1993 में हुए चुनाव में कैलाश विजयवर्गीय की जगह युवा नेता और हिंदूवादी भाजपा नेता लक्ष्मण सिंह गौड़ को मौका दिया गया. इसके बाद लक्ष्मण सिंह गौड़ ने 1998 और 2003 के चुनाव में जीत हासिल की.
2008 में एक सड़क दुर्घटना में लक्ष्मण सिंह गौड़ का निधन हो गया. इसके बाद उनकी पत्नी मालिनी गौड़ ने चुनाव लड़ा और वह विजयी हुई. उन्होंने 2008 और 2013 में भी इस सीट पर कब्जा जमाया रखा. 2014 में वह इंदौर महापौर चुनी गई और उनका कार्यकाल अगले साल खत्म होगा