हमारे देश में सेक्स के बारे में बात करना टैबू यानी वर्जित माना जाता है। यहां तो जवान लोगों के सेक्स लाइफ के बारे में खुलकर बात करने से लोग हिचकते हैं, फिर भला 60 साल की उम्र पार कर चुके बुजुर्गों की सेक्स लाइफ पर तो कोई क्या ही बात करेगा। 
भारत में बड़ी उम्र में सेक्सुअल लाइफ में ऐक्टिव होना अनोखी बात नहीं है। जरा सा दिमाग पर जोर डालेंगे तो आपके सामने कई उदाहरण आ जाएंगे जहां मां बेटे को घोड़ी चढ़ा चुकी होगी और उसके बाद भी उसकी खुद की डिलिवरी हुई हो। किसी का मामा भांजे की उम्र का मिलेगा तो किसी की दोती बेटी की उम्र की होगी। ऐसा होना हाल फिलहाल ही कम हुआ है। रुका फिर भी नहीं है। पर इस पर बात करना जरूर अनोखी बात है। 

बुजुर्गों की सेक्सुअल लाइफ पर भारत में भले ही कोई कारगर रिसर्च दिखाई नहीं देती हो लेकिन बाहर के देशों में इसे भरपूर तवज्जो दी जाती है। खुशहाल देश स्वीडन में हाल ही 70 साल से ज्यादा के लोगों की सेक्स लाइफ पर रिसर्च हुई। इसके नतीजे बताते हैं कि 1971 में जहां 52 पर्सेंट बुजुर्गों ने अपनी सेक्स लाइफ के ऐक्टिव होने की बात कही। वहां करीब 50 साल बाद इनकी संख्या बढ़कर 68 प्रतिशत हो गई। महिलाओं में यह संख्या 38 पर्सेंट से 56 पर्सेंट हो गई। 

2011 के पॉप्युलेशन सेंसस के मुताबिक भारत में 10.4 करोड़ बुजुर्ग 60 से ऊपर के हैं। युनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड का अनुमान है कि 2026 तक ये 17 करोड़ से ज्यादा हो जाएंगे। इंडिया में बुजुर्गों में बढ़ते अकेलेपन, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों पर बात करते वक्त उनकी सेक्शुअल लाइफ से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। बात जितना खुलकर हो, बेहतर है।