मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अपनी-अपनी जीत को लेकर पार्टियां दावे कर रही हैं. प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय नेताओं के साथ केंद्रीय स्तर के नेता भी मैदान में उतर चुके हैं. भाजपा की तरफ से पीएम मोदी, कई केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे हैं, तो कांग्रेस की तरफ से राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी मोर्चा संभाला हुआ है. मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ की एससी सीटों पर इस बार कांग्रेस की नजरें हैं.

पिछले विधानसभा चुनाव तक मालवा-निमाड़ की एससी सीटों पर भाजपा का वोट बैंक मजबूत था. यहां की 9 में से 9 एससी सीटें भाजपा के खाते में आई थींं और कांग्रेस को एक भी सीट पर विजय नहीं मिल पाई थी. यही कारण है कि राहुल गांधी की जनसभा बाबा साहेब अंबेडकर की जन्मस्थली महू में कराई जा रही है, जिससे एससी वोट बैंक को लामबंद किया जा सके. कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने कांग्रेस के एससी मोर्चा की बैठक कर एससी नेताओं को राहुल गांधी की महू जनसभा की जिम्मेदारी सौंपी है.

मालवा-निमाड़ की 66 सीटों पर कांग्रेस पूरा जोर लगा रही है और इसके लिए वो हर वर्ग को साधने में लगी हुई है. कांग्रेस मालवा की एससी सीटों के जरिए बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी में है. पिछले चुनाव में मालवा-निमाड़ की सभी नौ सीटों पर कांग्रेस को पराजय मिली थी, इसलिए इस बार कांग्रेस यहां कुछ ज्यादा ही सक्रिय है.

कांग्रेस प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया की बैठक में गुजरात से आए कांग्रेस के एससी प्रकोष्ठ के पर्यवेक्षक सिद्धार्थ वर्मा और प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेंद्र चौधरी ने भी समाज के अलग-अलग लोगों से चर्चा कर एससी समाज को लामबंद करने का प्रयास किया है. एससी विभाग के पर्यवेक्षक सिद्धार्थ वर्मा ने बताया कि इस बार एससी-एसटी समाज कांग्रेस के साथ है, क्योंकि पिछले पंद्रह वर्षों में इस समाज के साथ भेदभाव हुआ है.


मध्य प्रदेश में एक तरफ कांग्रेस जाति से ऊपर उठकर वोट करने की जनता से अपील करती है, वहीं खुद एससी समाज के वोट बैंक को साधने की राजनीति कर रही है. प्रदेश के एससी-एसटी वोट बैंक पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी दावा ठोक चुकी है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा कि बीएसपी से उनका अप्रत्यक्ष गठबंधन हुआ है, यानि जहां बीएसपी चुनाव लड़ेगी वहां समाजवादी पार्टी अपना प्रत्याशी खड़ा नहीं करेगी.

बहरहाल, राहुल गांधी के दौरे से पहले पार्टियों ने एससी-एसटी वोट बैंक पर अपना-अपना हक जताना शुरू कर दिया है, लेकिन इन समाजों का वोट किससे साथ है, यह तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चल पाएगा.