आजकल ज्यादातर देखने को मिलता है कि बच्चों को बहुत कम उम्र में ही चश्मा लग जाता है। इसका कारण लोग बच्चों की लापरवाही आदि को देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे वास्तु दोष भी हो सकता है। ज्योतिष दुनिया के जाने माने आचार्य कमल नंदलाल के अनुसार व्यक्ति की नज़र का कम होना भी वास्तु की वजह से हो सकता है। तो आईए जानते हैं कैसे
कहा जाता है कि न केवल वास्तु दोष बल्कि आज का खान-पान भी बच्चों की आइसाईट के कम होने का एक प्रमुख कारण बन चुका है। इसके बाद आइसाईट के खराब होने का सबसे बड़ा कारण हमारे द्वारा उपयोग होने वाला कंप्यूटर आदि। आज कल हर काम में इस सब का प्रयोग होने लगा है। लेकिन आपको बता दें कि इसे प्रयोग करने से पहले इस बात को जान लेना चाहिए कि वास्तु के अनुसार इसे किस जगह रखना चाहिए कि यह बुरे नहीं अच्छे प्रभाव डाले। 


सबसे पहले आपको बताते हैं कि हमारे आइसाईट हमारी कुंडली के किस ग्रह से संबंध रखती है, तो आपको बता दें कि दृष्टि का संबंध बुध और गुरु ग्रह से होता है। कहा जाता है कि व्यक्ति को दूर का चश्मा तब लगता है जब कुंडली में गुरु और सूर्य की दशा खराब हो जाती है। यानि जब वास्तु की दृष्टि से घर का पूर्वी कोना और उत्तर-पूर्वी कोना खराब हो जाता है तब व्यक्ति को दूर की नज़र का चश्मा लगता है।


तो वहीं पास की नज़र का चश्मा तब लगता है जब व्यक्ति की कुंडली में बुध और सूर्य खराब हो जाता है। यानि घर का ईस्ट और नॉर्थ मतलब पूर्वी और उत्तर भाग का खराब होना। 
 

इन सबको मिलाकर देखा जाए तो वास्तु के मुताबिक जब तीन घर की दिशाएं खराब हो जाएं तो इसका असर वहां रहने वाले बच्चों से लेकर बूढ़ों तक की नज़र पर बुरा प्रभाव  पड़ता है, जो है उत्तर दिशा, पूर्व दिशा और उत्तर पूर्व दिशा। माना जाता है कि इन तीनों दिशाओं को देवताओं की दिशा माना जाता है। इसलिए इन दिशाओं का खराब होना बहुत बुरे फल प्रदान करता है।


अगर आपके घर का उत्तरी कोना बिगड़ जाए और इस कोने की दीवारों पर लाइट-ब्राउन पेंट हो तो उत्तर दिशा के वास्तु दोषों की वजह से घर के बच्चों की आइसाईट खराब होने लगती है।  


अगर घर का पूर्वी कोना बिगड़ जाए तो, इस कोने में ज्यादा सनलाइट न आती हो तो या घर के बाहर पेड़ों की छाया आती हो तो भी बच्चों की दृष्टि पर बुरा असर पड़ता है।


इसके साथ ही अगर घर का उत्तर-पूर्वी कोना खराब हो जाए तो भी नज़र पर बुरा असर पड़ता है।