करवा चौथ का व्रत सौभाग्य और पति-पत्नी के बीच प्रेम का त्योहार है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत करती हैं। बदलते वक्त के साथ पति भी अपनी पत्नी का साथ निभाने के लिए व्रत करने लगे हैं। अगर आप दोनों पति-पत्नी ने भी साथ में करवा चौथ का व्रत रखा है तो बहुत अच्छा होगा अगर आप साथ में बैठकर पूजा भी करें। इससे आपके रिश्ते में ताजगी और मजबूती आएगी। करवा चौथ व्रत की पूजा में कुछ चीजों का बहुत महत्व है। ये चीजें इस व्रत के इतिहास और शक्ति का भी प्रतीक हैं। आइए, जानते हैं इनके बारे में…

सींक
करवा चौथ के व्रत की पूजा में कथा सुनते समय और पूजा करते समय सींक जरूर रखें। ये सींक मां करवा की उस शक्ति का प्रतीक हैं, जिसके बल पर उन्होंने यमराज के सहयोगी भगवान चित्रगुप्त के खाते के पन्नों को उड़ा दिया था।

करवा
माता का नाम करवा था। साथ ही यह करवा उस नदी का प्रतीक है, जिसमें मां करवा के पति का पैर मगरमच्छ ने पकड़ लिया था।

करवा माता की तस्वीर
करवा माता की तस्वीर अन्य देवियों की तुलना में बहुत अलग होती है। इनकी तस्वीर में ही भारतीय पुरातन संस्कृति और जीवन की झलक मिलती है। चंद्रमा और सूरज की उपस्थिति उनके महत्व का वर्णन करती है।

दीपक
हिंदू धर्म में कोई भी पूजा दीपक के बिना पूरी नहीं होती। इसलिए भी दीपक जरूरी है क्योंकि यह हमारे ध्यान को केंद्रित कर एकाग्रता बढ़ाता है। साथ ही इस पूजा में दीपक की लौ, जीवन ज्योति का प्रतीक होती है।

छलनी/चलनी/छन्नी
व्रत की पूजा के बाद महिलाएं छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसका कारण करवा चौथ में सुनाई जानेवाली वीरवती की कथा से जुड़ा है। जैसे, अपनी बहन के प्रेम में वीरवती के भाइयों ने छलनी से चांद का प्रतिविंब बनाया था और उसके पति के जीवन पर संकट आ गया था, वैसे कभी कोई हमें छल न सके।

लोटा
चंद्रदेव को अर्घ्य देने के लिए जरूरी होता है लोटा। पूजा के दौरान लोटे में जल भरकर रखते हैं। यह जल चंद्रमा को हमारे भाव समर्पित करने का एक माध्यम है।

थाली
पूजा की सामग्री, दीये, फल और जल से भरा लोटा रखने के लिए जरूरी होती है। इसी में दीपक रखकर मां करवा की आरती उतारते हैं।