इंदौर.  इंदौर फिर शर्मसार हुआ। इस बार भी अपनों ने जख्म दिए। दो साल की मासूम से मां के मामा ने ही ज्यादती कर डाली। घटना छत्रीपुरा थाना क्षेत्र के सेठी नगर की है। पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। सीएसपी सराफा डीके तिवारी ने बताया कि आरोपी लखन उर्फ लख्खू क्षेत्र का गुंडा है। उस पर द्वारकापुरी क्षेत्र में भी कई मामले दर्ज है। महिला का पति मूसाखेड़ी में रहता है। विवाद के चलते बच्ची की मां एक साल से पिता के यहां रह रही है। बच्ची के मेडिकल और उपचार के बाद उसे मां को सौंप दिया गया।
 

बिटिया रो रही थी, लेकिन दरिंदे के वजन के कारण रोने की आवाज भी नहीं आई

  1.  

    बच्ची की मां ने भास्कर को बताया कि बिटिया को मैंने दोपहर का खाना खिलाया था साहब... खाना खाकर उसे सुस्ती आने लगी। मैंने उसे सुला दिया। वह गहरी नींद में चली गई। मेरा हैवान मामा एक कोने में बैठे हुए मेरी बिटिया को बार-बार देख रहा था। सवा तीन बजे बच्ची की आंख खुली तो बोली- मम्मी भूख लग रही है। कुरकुरे लाकर दो। मैं किराने की दुकान की तरफ गई। पांच से सात मिनट में वापस भी आ गई। दरवाजा खोला तो मेरी सांस थम गई। मेरा दरिंदा मामा... बिटिया को नोच रहा था। बिटिया रो रही थी, लेकिन उस दरिंदे के वजन के कारण उसके रोने की आवाज भी नहीं आ रही थी। 

     

  2. एमवाय अस्पताल में भी यहां-वहां भटकती रही

     

    मां के मुताबिक, बच्ची के कमर के निचले हिस्से से खून दिखा तो मैं आपा खो बैठी। मैं दरिंदे पर टूट पड़ी। फिर बच्ची को गोद में लेकर बाहर आई। पड़ोसियों को चीख, चिल्लाकर बुलाया। लोगों ने दरिंदे को कमरे में बंद किया। मैं बच्ची को पहले क्लॉथ मार्केट अस्पताल लेकर पहुंची, लेकिन डॉक्टरों ने वहां से एमवाय अस्पताल भेज दिया। मैं टैक्सी से बच्ची को एमवाय ले गई। बच्ची का रो-रोकर बुरा हाल था। टैक्सी वाले को भी बच्ची को देखकर दुख हो रहा था। 

     

  3.  

    एमवाय पहुंचकर सीधे कैजुअल्टी में गई तो डॉक्टर बोले- इसे महिला वार्ड में ले जाओ। महिला वार्ड में गई तो कहा नीचे कैजुअल्टी में ले जाओ। आखिर परेशान होकर मैं छत्रीपुरा थाने पहुंची। थाने पहुंचते ही पुलिस बच्ची को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची। दोपहर साढ़े तीन से साढ़े पांच बजे तक मैं भटकती रही। दो घंटे तक मेरी फूल सी बच्ची रोती-कराहती रही। उसे भूख लग रही थी, लेकिन वह दर्द के कारण भूख ही भूल गई। पानी भी नहीं पीना चाहती। वह मेरा हाथ भी नहीं छोड़ना चाहती।