इंदौर ,  कंप्यूटर बाबा अपनी मन की बात में नर्मदा में अवैध खनन, गोरक्षा और मंदिर निर्माण के मुद्दे पर चर्चा करेंगे. विधानसभा चुनाव के सरगर्मी के बीच कंप्यूटर बाबा ने बीजेपी के परेशानी को बढ़ा दिया है.

कंप्यूटर बाबा 23 अक्टूबर को इंदौर और इसके बाद 30 अक्टूबर को ग्वालियर, 4 नवंबर को खंडवा, 11 नवंबर को रीवा, 23 नवंबर को जबलपुर में संतों के समागम में अपने मन की बात करेंगे.

बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कंप्यूटर बाबा ने एक अक्टूबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने आरोप लगाया था कि शिवराज सरकार संत समाज की उपेक्षा कर रही है. इसके बाद से वो लगातार सरकार और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं.

कंप्यूटर बाबा उन पांच बाबाओं में शामिल हैं जिन्हें शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा था.

गौरतलब है कि कंप्यूटर बाबा मूल रूप से जबलपुर के पास स्थित बरेला के निवासी हैं. वो करीब 28 साल पहले बनारस पहुंचे थे. वहां उनके गुरू के मठ में दीक्षा ली और देश में कम्प्यूटर का आगमन भी उसी समय हुआ था. मठ में उस समय कंप्यूटर लाया गया, जिसे चलाना सिर्फ  स्वामी नामदेव त्यागी को ही आता था. मठ की कमान बाबा को सौंपी, तभी से उन्हें कंप्यूटर बाबा का नाम मिला.

कंप्यूटर बाबा का पूरा नाम अनंत विभूषित 1008 महामंडलेश्वर नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा है. दो साल पहले वे तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने सिंहस्थ में मप्र सरकार की तैयारियों की पोल खोली थी. बाबा ने उज्जैन से लेकर दिल्ली तक मप्र सरकार द्वारा सिंहस्थ में किए गए गोलमाल को उजागर किया.

सरकार ने सिंहस्थ के दौरा क्षिप्रा में साफ पानी का प्रवाह का दावा किया था, लेकिन बाबा ने सरकार के दावों की पोल खोली और क्षिप्रा में खड़े होकर अनशन किया और बताया कि क्षिप्रा में मैला पानी बह रहा है. बाबा के आंदोलन के बाद मप्र की सरकार में हड़कंप मच गया था.