नई दिल्ली,  दिल्ली में अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री के लिए लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं. साथ ही उनकी सरकार के कामकाज से लोग संतुष्ट ज्यादा हैं और नाखुश कम हैं. इंडिया टुडे पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के सातवें संस्करण के मुताबिक सर्वे में दिल्ली में 47 फीसदी प्रतिभागियों ने मुख्यमंत्री के लिए केजरीवाल को पहली पसंद बताया है.

जहां तक पंजाब का सवाल है तो सर्वे के मुताबिक कैप्टन अमरिंदर सिंह तो मुख्यमंत्री के लिए लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार के कामकाज से वोटर नाखुश ज्यादा हैं और संतुष्ट कम हैं.

राजनीतिक नब्ज़ को हर हफ्ते ट्रैक करने वाले देश के पहले कार्यक्रम PSE में इस बार दिल्ली और पंजाब के लिए सर्वे हुआ. ये सर्वे 11 से 17 अक्टूबर के बीच किया गया.

दिल्ली

इंडिया टुडे-माई-इंडिया PSE सर्वे के मुताबिक दिल्ली में 47 फीसदी वोटर अरविंद केजरीवाल को ही मुख्यमंत्री के तौर पर आगे भी कमान संभालते देखना चाहते हैं. लोकप्रियता के मामले में वो अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से कहीं आगे हैं. शीला दीक्षित को सिर्फ 19 फीसदी वोटरों ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी पसंद बताया. बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन को 13% और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को 9% वोटरों ने मुख्यमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया.

केजरीवाल के नेतृत्व वाली मौजूदा AAP सरकार के कामकाज से दिल्ली के 41 फीसदी वोटर संतुष्ट हैं. सर्वे के 35 फीसदी प्रतिभागियों ने केजरीवाल सरकार के कामकाज पर नाखुशी जताई. वहीं 21 फीसदी वोटरों ने इसे औसत बताया.

जहां तक केंद्र में मोदी सरकार के कामकाज का सवाल है तो दिल्ली में 42 फीसदी वोटर इससे संतुष्ट हैं. सर्वे में दिल्ली से 36 फीसदी प्रतिभागी मोदी सरकार के कामकाज से नाखुश दिखे. वहीं 19 फीसदी प्रतिभागियों ने मोदी सरकार के कामकाज को औसत माना.  

सर्वे में दिल्ली से 49 फीसदी प्रतिभागी नरेंद्र मोदी को फिर देश का प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं. दिल्ली में 43 फीसदी वोटरों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के लिए अपनी पसंद बताया. इस तरह दिल्ली में लोकप्रियता के मामले में मोदी और राहुल में ज्यादा बड़ा फासला नहीं दिखा. दिल्ली में 5 फीसदी प्रतिभागियों ने प्रधानमंत्री के लिए अरविंद केजरीवाल के पक्ष में भी अपना वोट दिया.

सर्वे में दिल्ली के लोगों ने नाला/नाली/साफ-सफाई को सबसे बड़ा मुद्दा बताया. इसका बड़ा कारण ये भी हो सकता है क्योंकि दिल्ली में AAP की सरकार है और तीनों MCD पर बीजेपी का कब्जा है. हाल में ईस्ट दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन के तहत आने वाले सफाईकर्मी अपने भत्तों का भुगतान ना होने की वजह से हड़ताल पर रहे जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा. साफसफाई के बाद दिल्ली के वोटरों ने पीने के पानी, प्रदूषण और महंगाई को भी अन्य अहम मुद्दों के तौर पर गिनाया.

सर्वे में ये पूछे जाने पर कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने के लिए कौन जिम्मेदार हैं तो सर्वे में 38 फीसदी प्रतिभागियों ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने के लिए केजरीवाल सरकार को सिर्फ 5 फीसदी वोटरों ने ही जिम्मेदार माना. वहीं 22 फीसदी वोटर ऐसे रहे जिन्होंने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों को ही इस मुददे पर समान रूप से जिम्मेदार ठहराया.

राफेल डील के बारे में दिल्ली में 63 प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने इसके बारे में नहीं सुना. सिर्फ 37 फीसदी वोटरों को राफेल डील के बारे में जानकारी थी. जिन्होंने राफेल डील के बारे में सुन रखा था, उनमें से 19% का मानना है राफेल डील में भ्रष्टाचार नहीं हुआ. वहीं 18% मानते हैं कि डील में भ्रष्टाचार हुआ. सर्वे में 63% प्रतिभागियों ने कहा कि वो इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कह सकते.

राजनीतिक विश्लेषक और पूर्व AAP नेता आशुतोष ने इस बात पर सहमति जताई कि केजरीवाल सरकार को सुविधाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों की स्थिति बेहतर करने की वजह से जनसमर्थन हासिल किया है.

आशुतोष ने कहा, AAP  के पक्ष में चार बातें गई हैं- बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य. इन चारों सेक्टरों में, मैं समझता हूं कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने असाधारण काम किया है. बिजली और पानी ने गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बड़े वर्ग को निश्चित रूप से संतुष्ट किया है. इससे बिहार और अन्य हिस्सों से आए लोगों को भी लाभ मिला है.

चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव थोड़ी अलग राय रखते हैं. यादव के मुताबिक AAP सरकार सीमित स्तर पर ही सफल रही है लेकिन इसे किसी असली विपक्षी चुनौती का सामना नहीं है.

यादव ने कहा, ‘मैं कहूंगा कि ये सीमित और थोड़ी बहुत कामयाबी ही है. बहुत मायने में, तथ्य यही है कि असल में कोई विपक्ष नहीं है. MCD चुनावों में बीजेपी को शानदार कामयाबी मिली. लोकसभा चुनाव में बडी जीत मिली. आज उनके पास कोई नेता नहीं है. एजेंडा नहीं है...कांग्रेस फिर वापसी करती प्रतीत हो रही थी लेकिन ये अपनी अंदरूनी चालबाज़ियों में उलझ कर रह गई लगती है. ऐसे में राज्य में विपक्ष की ओर से असल में चुनौती ही नहीं है.’

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने AAP  पर कामकाज का तानाशाही अंदाज अपनाने का आरोप लगाया. पात्रा ने कहा, आम आदमी पार्टी को अंदर से ही विस्फोट का सामना है. याद रखिए, भारत जैसे महान देश वाले लोकतंत्र में एक आदमी की पार्टी नहीं हो सकती. और यही है आम आदमी पार्टी जहां तक खुद को घटा कर ले आई है.

AAP नेता आदर्श शास्त्री ने कहा कि उनकी पार्टी की सरकार ने बुनियादी मुद्दों पर अपना फोकस कर रखा है. शास्त्री ने कहा,  लोकप्रियता के मायने हैं कि आप सरकार बनाएं और सत्ता में रहते हुए लगातार अच्छा करके दिखाएं. अहम बात ये है कि अरविंद केजरीवाल ने इस बात पर अपना फोकस बनाए रखा कि शहर के लोगों की जरूरत क्या हैं. बुनियादी ढांचे को ठीक करना, स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक करना और बिजली-पानी की दिक्कतों को सुलझाना.’

70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा के लिए 2015 में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाई थी. इस चुनाव में आम आदमी पार्टी को 67 सीटों पर कामयाबी मिली थी. बीजेपी को सिर्फ तीन सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. वहीं कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका था.

इंडिया टुडे-एक्सिस-माई-इंडिया सर्वे दिल्ली के 7 संसदीय क्षेत्रों में लोगों से फोन पर लिए गए साक्षात्कारों पर आधारित है. दिल्ली के लिए  PSE सर्वे में कुल 2,845 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.

पंजाब

पंजाब में करीब डेढ़ साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में बड़ी कामयाबी मिलने के बाद कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य के मुख्यमंत्री बने. PSE से पंजाब की जो ताजा तस्वीर निकली है वो कैप्टन की चिंता बढ़ाने वाली है. सर्वे में 45 फीसदी प्रतिभागियों ने अमरिंदर सरकार के कामकाज को लेकर नाखुशी जताई है. सिर्फ 28 फीसदी वोटर ही राज्य सरकार के कामकाज से संतुष्ट है. अमरिंदर सरकार के कामकाज को औसत बताने वाले वोटर 24% हैं.

मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के लिए ये राहत वाली बात है कि अब भी वो राज्य में मुख्यमंत्री के लिए सबसे ज्यादा लोगों की पसंद बने हुए हैं. PSE सर्वे में 42 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वो कैप्टन को आगे भी पंजाब के मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री और वयोवृद्ध अकाली नेता प्रकाश सिंह बादल के पक्ष में 29 फीसदी प्रतिभागियों ने ही वोट दिया. बादल के पुत्र सुखबीर सिंह बादल को मुख्यमंत्री के लिए 12% प्रतिभागियों ने अपनी पसंद बताया.

जहां तक केंद्र का सवाल है तो मोदी सरकार से पंजाब में लोग नाखुश ज्यादा हैं और संतुष्ट कम. पंजाब में 42 फीसदी वोटर मोदी सरकार के कामकाज से नाखुश हैं और 31% संतुष्ट. 25% प्रतिभागी मोदी सरकार के कामकाज को औसत बताते हैं.

सर्वे में पंजाब से एक और अहम बात निकल कर आई है और वो ये है कि प्रधानमंत्री पद के लिए लोकप्रियता के मामले में नरेंद्र मोदी से राहुल गांधी आगे हैं. सर्वे में 36% प्रतिभागियों ने राहुल गांधी के हक में वोट दिया. वहीं 32% वोटरों ने ही कहा कि वे नरेंद्र मोदी को एक और कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं.  

सर्वे में राज्य के लोगों ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा बताया. इसके अलावा महंगाई, नाला-नाली/साफ सफाई, किसानों की समस्याएं और गांवों को जोड़ने वाली सड़कों की स्थिति भी अन्य अहम मुद्दों के तौर पर उभरे.

पंजाब में पेट्रोल-डीजल दाम बढ़ने के लिए 31 फीसदी प्रतिभागी केंद्र सरकार को जिम्मेदार मानते हैं. इसके लिए राज्य सरकार को 4 फीसदी वोटरों ने ही जिम्मेदार माना. 50 फीसदी प्रतिभागियों की राय में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही जिम्मेदार है.

सर्वे के मुताबिक पंजाब में राफेल डील के बारे में 71% प्रतिभागियों ने नहीं सुना. सिर्फ 29 फीसदी को ही इसकी जानकारी थी. जिन्होंने राफेल डील के बारे में सुन रखा है उनमें से 35 फीसदी का मानना है कि डील में भ्रष्टाचार हुआ है. सर्वे में हिस्सा लेने वाले 17% वोटरों की राय में राफेल डील में भ्रष्टाचार नहीं हुआ.

पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा, ‘लोग कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं. ये उन राज्यों में से एक हैं जहां चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया गया था.’

जाखड़ ने कहा, ‘पंजाब अकेला राज्य है जहां कर्ज माफी का वादा किया था और उस पर अमल करके दिखाना शुरू किया. सरकार चाहती तो इसे चुनाव तक टाल सकती थी.’आशुतोष ने माना कि AAP पंजाब में अपन जमीन खो चुकी है. आशुतोष ने कहा, ‘पंजाब में AAP खत्म हो चुकी है. मोदी सरकार और अमरिंदर सरकार के खिलाफ लोगों में भारी असंतोष के बावजूद AAP कहीं वजूद में नहीं है. असल में, पंजाब में बादलों की AAP से ज्यादा लोकप्रियता है.’

योगेंद्र यादव के मुताबिक ‘कैप्टन अमरिंदर सिंह को कई चुनौतियों का सामना है. साथ ही पंजाब के वोटर दोबारा अकाली-बीजेपी गठबंधन को सत्ता में नहीं लाना चाहते.’यादव ने कहा, किसानों में कुछ हद तक नाराजगी है क्योंकि कांग्रेस ने कर्ज माफी और अन्य सुविधाओं को लेकर उनसे लंबे चौड़े वादे किए थे. किसानों के संगठन अमरिंदर सरकार से बहुत नाखुश हैं, ऐसे में वहां सत्ता विरोधी रूझान की संभावना बनती है. कांग्रेस से लोग नाखुश हैं लेकिन वो अकाली-बीजेपी गठबंधन को दोबारा सत्ता में नहीं लाना चाहते. तीसरे विकल्प ने खुद को तबाह कर लिया है.’

संबित पात्रा ने सर्वे के इस निष्कर्ष से असहमति जताई कि पंजाब में राहुल गांधी की लोकप्रियता प्रधानमंत्री मोदी से अधिक है. पात्रा ने कहा, ‘जब पंजाब में चुनाव हो रहे थे तब ऐसी चर्चा थीं कि राहुल गांधी के पंजाब में चुनाव प्रचार के लिए नहीं जाने से अमरिंदर सिंह बहुत खुश थे.’पात्रा ने कहा, ‘जहां तक प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी का सवाल है तो राहुल गांधी खुद ही मोदी का प्रतिद्वंद्वी बनने को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.’

117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा के लिए 2017 में हुए चुनाव में कांग्रेस को 77 सीट पर कामयाबी मिली. इन चुनावों से पंजाब में आगाज करने वाली आम आदमी पार्टी को 20 सीट पर विजय मिली. शिरोमणि अकाली दल बादल को 15 सीट और उसकी सहयोगी बीजेपी को 3 सीटों से ही संतोष करना पड़ा. इंडिया टुडे-एक्सिस-माई-इंडिया सर्वे में पंजाब के 13 संसदीय क्षेत्रों में 4,980 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.