भोपाल ।   मप्र कर्मचारी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र खोंगल ने मप्र के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को प्रदेश में आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव आयोग की अनुमति प्राप्त कर केंद्र कर्मचारियों की भांति बोनस देने की परम्परा पुन- प्रारंभ करते हुए इस वर्ष दीपावली पर्व के पहले बोनस देने की मांग राज्य शासन से की है।
 मप्र कर्मचारी कांग्रेस के अध्यक्ष वीरेंद्र खोंगल, हीरालाल चौकसे, तय्यब अली, सुरेंद्र निगम, अवधेश अरुण एवं अनवर खान ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रेषित ज्ञापन में अवगत कराया कि मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह द्वारा राज्य के चतुर्थ एवं तृतीय वर्ग के कर्मचारियों को 1985 से 14 दिन के वेतन के बराबर बोनस देने की शुरुआत की गई थी, इसके उपरांत इसे बढाकर 19 और फिर 21 दिन के बेतन के बराबर बोनस दिया गया था, राज्य के तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को वर्ष 1996 तक दीपावली के पर्व पर बोनस नियमित रुप से मिलता रहा। बाद में अचानक इसे वर्ष 1996 से बंद कर दिया गया। इससे अब तक कर्मचारियों को 1900 करोण रुपये का नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि जब मप्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों की भांति राज्य कर्मचारियों को वेतनमान भत्ते एवं सभी सुविधाएं देने का निर्णय लिया है। तब मप्र के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को केंद्र की भांति बोनस भी दिया जाना चाहिए। खोंगल ने कहा कि दिवाली का पर्व उत्स्वी माहौल में मनाने के लिए बोनस की शुरुआत हुई थी ताकि महंगी जीवनोपयोगी वस्तुएं खरीदकर कर्मचारी एवं उसके परिवार के सदस्य त्यौहार का आनंद ले सके।