स्मार्ट सिटी ग्वालियर डेंगू की चपेट में है. शहर में डेंगू का डंक लोगों को बेहाल कर रहा है. तीन महीनों के दौरान ग्वालियर शहर में 1266 लोग डेंगू की चपेट में आये हैं. अब तक डेंगू से शहर में चार लोगों की मौत हो चुकी है. डेंगू को काबू करने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम साबित हो रहा है, यही वजह है कि सरकारी अस्पातालों में डेंगू से मरीज फर्श पर इलाज कराने के लिए मजबूर है.

शहर में दिन ब दिन डेंगू के मरीज बढ़ते ही जा रहे हैं. हालात यह है कि अगस्त से लेकर 16 अक्तूबर कर 1266 लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं. इनमें से चार लोगों की इलाज के दौरान मौत भी हो चुकी है. चिंता का विषय यह है कि डेंगू के संदिग्धों में 54 फीसदी मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है.

ग्वालियर के डीडी नगर, सिकंदर कंपू जैसे इलाकों में डेंगू का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है. अगर आकंड़ों की बात की जाए तो 2010 से 2014 तक पांच साल में डेंगू के कुल 934 मरीज आये थे, जबकि 2015 से 2018 तक चार वर्षों में डेंगू के मरीजों की संख्या 5909 तक पहुंच गई है. इस साल तो महज तीन महीनों में ही इन मरीजों की संख्या 1266 तक पहुंच चुकी है. मामले में स्वास्थ्य महकमा डेंगू की रोकथाम के लिए अभियान चलाने की बात कह रहा है.

डेंगू का सबसे ज्यादा प्रभाव नगरीय आवास मंत्री माया सिंह के इलाके में हो रहा है. डेंगू प्रभावित इलाके के लोग भी मंत्री से डेंगू की रोकथाम के लिए सवाल करने लगे हैं. डेंगू का डंक स्मार्ट सिटी ग्वालियक के लिए बीमारी का सबब बना हुआ है, लेकिन स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना हुआ है. शहर के कई इलाकों में गंदा पानी, गंदगी और मच्छर बीमारियों की वजह बन रहे हैं.