चैत्र हो या शारदीय नवरात्र, दोनों के दौरान ही मां दुर्गा का विशेष पूजन किया जाता है। इसके साथ ही इनके नौ रूपों की पूजा की बड़ी महत्ता मानी जाती है। नवरात्र के नौ दिन में हर कोई मां को खुश करने के लिए मां की पूजा-अर्चना करता है। लेकिन फिर भी कभी-कभी उसे मां का पूरा अाशीर्वाद प्राप्त नहीं कर पाता। तो आपको बता दें वास्तु में कुछ एेसी बातों के बारे में बताया गया है जिनका नवरात्र में ध्यान रखना बहुत ज़रूरी माना जाता है। अगर इन बातों को ध्यान में रखकर मां दुर्गा व उनके नौ रूपों की पूजा की जाए तो शुभ की जगह अशुभ फल प्राप्त होने का भय बना रहता है। तो आइए जानते हैं इससे संबंधित कुछ बातें- 

वास्तु शास्त्र में बहुत सी बातों के बारे में बताया गया है। इसमें सबसे ज्यादा दिशाओं को महत्व दिया जाता है। इसके अनुसार नवरात्र में दीपक कहां, किस दिशा और कैसे जलाना चाहिए इस बारे में बहुत अच्छे से बताया गया है। माना जाता है कि नवरात्र में सिर्फ देसी घी का दीपक और तिल के तेल का दीपक ही जलाया जाता है।

एेसा माना जाता है कि नवरात्र में घी का दीपक हमेशा माता रानी के दाहिने हाथ यानि अपने बाएं हाथ की तरफ़ रखना चाहिए।

वहीं तिल के तेल के दीपक की बात करें तो इसे मां के बाएं हाथ यानि अपने दाहिने हाथ की ओर होना रखना चाहिए।

मान्यता के अनुसार घी के दीपक में सफ़ेद खड़ी बत्ती लगानी चाहिए जबकि तिल के तेल में लाल और पड़ी बत्ती लगानी शुभ मानी जाती है।

ज्योतिष और हिंदू धर्म के अनुसार घी का दीपक देवता के लिए समर्पित होता है जबकि तिल के तेल का दीपक व्यक्ति की कामना पूर्ति के लिए होता है।

वास्तु के अनुसार आप अपनी इच्छानुसार एक या दोनों दीपक जला सकते हैं। इससे घर के वास्तु का अग्नि तत्व मज़बूत होता है।