काठमांडू, नेपाल में एक अनोखी परंपरा के तहत तीन साल की तृष्णा शाक्य को अगली ‘कुमारी देवी’ चुना गया है। कुमारी देवी बनने के बाद तृष्णा मंगलवार को पहली बार सार्वजनिक रूप से लोगों के बीच आईं। उनके दर्शन करने के लिए भारी संख्या में लोग जुटे और उनकी इंद्र जात्रा के दौरान उनकी पालकी निकाली गई। नेपाली परंपरा के तहत कुमारी देवी तृष्णा को अब अपने घर परिवार से दूर देवी के रूप में एक विशेष महल में रहना होगा।

चयन ऐसे: जन्म कुंडली में 32 गुण जरूरी

नेपाली परंपराओं के तहत शाक्य या वज्रचार्य जाति की बच्चियों को कुमारी देवी चुना जाता है। इस जाति की बच्चियों को तीन वर्ष का होते ही परिवार से अलग कर दिया जाता है और उन्हें कुमारी नाम दे दिया जाता है। इनकी जन्म कुंडली को देख कर तय संयोग मिलाए जाते हैं। कुमारी देवी में 32 गुण मिलने चाहिए। इसके बाद इन बच्चियों के सामने कटे भैंसे का सिर रखा जाता है और पुरुष डरावने मुखौटे लगाकार इनके समक्ष नाचते हैं। ऐसे में जो बालिका इन सब से डरती नहीं उसे मां काली का रूप मानकर कुमारी देवी चुना जाता है। 

शरीर से खून की बूंद भी निकली तो पद छोड़ना होता है

कुमारी देवी को मूल रूप से किशोरावस्था शुरू होते ही पद छोड़ना होता है। साथ ही अगर किसी चोट या जख्म की वजह से इनके शरीर से खून निकलने पर भी कुमारी देवी को पद छोड़ना होता है। 

आजीवन नहीं होती शादी  

कुमारी देवी की पदवी से हटने के बाद उन्हें आजीवन पेंशन तो मिलती है लेकिन उनकी शादी नहीं होती है। नेपाल में ऐसी मान्यता हे कि जो भी पुरुष पूर्व कुमारी देवी से विवाह करता है उसकी मृत्यु कम उम्र में हो जाती है।