महाभारत के मुख्य पात्र पांच पांडव भीम, अर्जुन, नकुल, सहदेव और युधिष्ठिर थे, जिनमें से सबसे बड़े युधिष्ठिर थे। सभी भाई अपने बड़े भ्राता का बहुत आदर करते थे। लेकिन क्या आप जानते हैं एक समय एेसा भी आया था जब भीम क्रोधित होकर अपने प्रिय भ्राता के हाथ अग्नि में जला देने पर आतुर हो गए थे। जी हां आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन शास्त्रों में इस प्रसंग के बारे में पढ़ने को मिलता है। 
पौराणिक कथाओं के अनुसार जब युधिष्ठिर जुए में द्रोपदी को हार गए तो द्रौपदी को भरी सभा में बुला कर उसको अपमानित किया गया। जिसे देखकर भीम बहुत क्रोधित हो गए और युधिष्ठिर से कहने लगे कि आपने जुए में जो धन हारा है, उससे मुझे क्रोध नहीं है, लेकिन द्रोपदी को आपने जो दांव पर लगाया है, यह बहुत ही गलत है। द्रोपदी अपमान करने के योग्य नहीं है, लेकिन आपके कारण ये दुष्ट कौरव उसे कष्ट दे रहे हैं यहीं और भरी सभा में अपमानित कर रहे हैं। जो मुझ बर्दाश नहीं।  
इसके बाद भीम युधिष्ठिर से कहते हैं कि द्रोपदी की इस दशा का कारण आप हैं। इसलिए मैं आपके दोनों हाथ जला डालूंगा। इतना ही नहीं भीम सहदेव से आग लाने को भी कहते हैं। भीम की यह बात सुनकर अर्जुन उन्हें समझाते हैं और कहते हैं कि युधिष्ठिर ने क्षत्रिय धर्म के अनुसार ही जुआ खेला है। इसमेंं इनका कोई दोष नहीं हैं। अर्जुन की बात सुनकर भीम का क्रोध शांत हो गया और वे बोले कि इस बात से मैं भी अनजान नहीं हूं, नहीं तो मैं बलपूर्वक इनके दोनों हाथ अग्नि में जला डालता।