रायपुर : राजधानी में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए नगर निगम ने टेंडर किया, लेकिन नियम-शर्तों की पेंच में यह लटक गया है। अब पूरा भार बैरनबाजार स्थित पशु चिकित्सालय में पदस्थ दो चिकित्सकों पर आ गया है इनकी नियुक्ति महापौर प्रमोद दुबे के प्रस्ताव पर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की थी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ये कुत्ते तो नहीं पकड़ सकते, निगम का डॉग कैचर जितने को पकड़कर ले आता है, उनकी नसबंदी कर देते हैं। बमुश्किल दिन में 2-4 ही। जबकि रोजाना 20 की नसबंदी होनी चाहिए।
राजधानी आवारा कुत्तों की जद में है। हर गली में कुत्तों का आतंक है चाहे सुबह हो या शाम। रात में तो ये गाड़ियों के पीछे दौड़ते हैं। लगता है काट ही खाएंगे। अगर जल्द निगम टेंडर की प्रक्रिया नहीं करता है तो पांच साल के शुभ जैसे और भी बच्चे कुत्तों के पंजें में होंगे। शुभ के जख्म अभी भी भरे नहीं हैं, वह दहशत में है। निगम भले ही दावा करे कि उसने 10 हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी की है, लेकिन इनकी संख्या तो जमकर बढ़ रही है। बता दें कि नसबंदी के अलावा कुत्तों की संख्या कम करने का दूसरा विकल्प नहीं है।
धरपकड़ नहीं हो रही- टैगोर नगर में शुभ को कुत्तों ने नोचा उसके दूसरे दिन डॉग कैचर टीम पहुंची और कुछ कुत्तों को दबोचा। यह घटना के बाद की स्थिति है। दूसरे क्षेत्रों में टीम पहुंची ही नहीं है। लोग दहशत में हैं, क्योंकि बीते दो सालों में तीन बच्चों की जान जा चुकी है।