नई दिल्ली: उपभोक्ता मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार एमआरपी के कानून में बदलाव करने के बारे में विचार कर रही है, इसके लिए एक कमिटी का गठन किया गया है जो इसपर विचार करेगी और देखेगी एमआरपी के कानून में क्या बदलाव किया जा सकता है.

क्यों कानून में बदलाव पर हो रही है चर्चा?
दरअसल, एमआरपी को लेकर कई राज्यों में अलग-अलग केस चल रहे हैं. लंबे समय से ड्यूल एमआरपी और ओवर चार्जिंग को लेकर होटल, मल्टीप्लेक्स, छोटी दुकान, बड़ी दुकान, सिनेमाघर और मॉल्स में एमआरपी कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. पिछले दिनों महाराष्ट्र में सिनेमाघरों में एमआरपी पर भले ही राहत देने वाला फैसला आया है लेकिन होटल और रेस्टोरेंट अब भी एमआरपी के मामले में अपनी मनमानी कर सकते हैं क्योंकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने राहत दे रखी है. ऐसे में उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन हो रहा है. उन्हें एक ही उत्पाद के लिए अलग अलग जगह पर अलग एमआरपी देनी पड़ रही है. उपभोक्ता ओवर प्राइजिंग के शिकार भी होते हैं. ये सब देखते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एमआरपी से जुड़े जितने मामले चल रहे हैं, उन सबको एक करके उनपर सुनवाई के लिए ट्रांसफर पीटिशन दायर की है. 

लीगल मेट्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर जरूरत पड़ी तो कानून में बदलाव भी किया जा सकता है और इसपर चर्चा शुरू हो गई है. गौरतलब है कि 2017 में पैकेजिंग कमोडिटी एक्ट में बदलाव किया गया था और इसके मुताबिक एमआरपी का नया कानून 2018 मार्च से लागू हो गया था. लेकिन आज भी एमआरपी कानून को ढंग से लागू करने में सरकार विफल होती नजर आ रही है. 
क्या है नए लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट में?
पूरे देश के हर कोने में हर उत्पाद की कीमत एक होगी और लिखी हुई एमआरपी से ज्यादा कोई चार्ज नहीं कर पाएगा. दुकान, सिनेमाघर, मॉल, रेलवे स्टेशन, बड़ी दुकानें हर कहीं एक एमआरपी ही होगी. एक जनवरी 2018 से लागू हए इस एक्ट के मुताबिक निर्माता को प्रोडक्ट की पूरी डिटेल्स प्रिंसिपल डिसप्ले पैनेल में रखनी होगी. पहले प्रोडक्ट की सील पैक पर या किसी भी जगह एमआरपी या बाकी डिटेल्स लिख सकते थे, जिससे कंज्यूमर के लिए उसे पढ़ना आसान नहीं होता था. 

इसलिए वेंडर इसका फायदा उठाकर इसे मिटाने में कामयाब होते हैं क्योंकि ग्राहक को एमआरपी दिखाई नहीं देती. कई बार एमआरपी केवल ऑनलाइन पिंट होती है इसलिए अब उसपर कड़े नियम होंगे. 40 सेमी के अंदर एमएफजी, एमआरपी और पोडक्ट की बाकी डिटेल्स लिखनी होगी ताकी ग्राहक को डिसप्ले में आसानी हो. अगर अब नियमों का पालन नहीं हुआ तो कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी. एमआरपी के ऊपर जीएसटी चार्ज करना भी गलत है.