धर्म के दस लक्षणों में बुद्धि का सर्वाधिक महत्व है। धर्मशास्त्रों में कहा गया है- यस्य बुद्धिर्बलम् तस्य, निर्बुद्धे: तु कुत: बलम्। यानी जिसके पास बुद्धि है, वही बलशाली है। क्योंकि बुद्धि के बिना शारीरिक बल भी महत्वहीन हो जाता है। गौरतलब है कि सनातन संस्कृति में बुद्धि के प्रतीक एवं अधिष्ठाता गणेश जी को माना गया है। गणेशजी के सिर को गज यानी हाथी के रूप में प्रदर्शित करना मेधा शक्ति का परिचायक है।

हाथी के बड़े आकार का सिर विवेक और प्रज्ञाशक्ति के समन्वय को दर्शाता है। बुद्धि तो हरेक के पास होती है, किंतु विवेक के बिना बुद्धि डिस्ट्रक्टिव गतिविधियों की ओर उन्मुख हो जाती है। हम जानते हैं कि गणेजी स्वयं विघ्नहर्ता हैं और किसी भी शुभ कार्य के मार्ग में आने वाले अवरोधों का उन्मूलन करने वाले देवता हैं। इसलिए सनातन धर्म की परंपरा में प्रत्येक शुभ कार्य का प्रारंभ गणेश वंदना से किया जाता है। गणपति बप्पा का विशाल उदर करुणा, उदारता और पूर्ण स्वीकारोक्ति का द्योतक है।

जिस समाज में, जिस परिवेश में करुणा, उदारता और हरेक परिस्थिति के प्रति सहज स्वीकृति की भावना निर्मित होने लगती है, वहां श्रद्धा, आस्था और सत्य का स्वाभाविक प्रकटीकरण होने लगता है। लोकमान्य तिलक ने स्वाधीनता आंदोलन में चेतना जागृत करने के उद्देश्य से 1893 में गणेशोत्सव का आगाज किया। तिलक ने लोगों की बौद्धिक क्षमता का इस्तेमाल रचनात्मकता की ओर प्रवृत्त कर राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई ऊर्जा व ऊंचाई प्रदान की।

गणेशजी को एकदंत भी कहा जाता है। जो निश्चित तौर पर पूर्ण एकाग्रता का प्रतीक है, जबकि उनके हाथों में विराजमान अंकुश पूर्ण सजगता का परिचायक है। गणेशजी के दूसरे हाथ में मौजूद पाश आत्मनियंत्रण का प्रतीक है। दरअसल, जब कोई व्यक्ति आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर होता है तो उसके प्रारब्ध रूपी विकर्म और पुरातन संस्कारों का आवरण बिखरने लगता है, धीरे-धीरे उसकी प्राणदायिनी शक्ति और आत्मचेतना संपूर्ण शरीर में अपना विस्तार करती है। उस स्थिति में आध्यात्मिक ऊर्जा मुक्त होकर एक फैलाव ग्रहण करती है। उस विशेष अवस्था में यदि व्यक्ति विवेक और आत्मसंयम से स्वयं को नियंत्रित न करे तो वह ऊर्जा विध्वंस और पतन का कारण भी बन सकती है।

गणेश जी का वाहन चूहा भी सांकेतिक है। दरअसल, चूहा उन विकारों को आसानी से कुतर देता है जो आध्यात्मिक प्रगति के पथ में बाधा बनकर आते हैं। गौरतलब है कि गणेशसुभाषितानि में गणपति का आवाह्न किया गया है- हे विघ्न-विनाशक, बुद्धिदायक हमारे मार्ग में आने वाले सभी अवरोधों को दूर कर हमें ज्ञान के आलोक से आलोकित करो, ज्ञान की अग्नि​ से हमारे समस्त प्रकार के बंधनों, अंधविश्वासों और विकर्मों को तिरोहित कर दो।