इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ अपने और अपने परिवार के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के दो अन्य मामलों में सुनवाई के लिए आज एक बार फिर एक जवाबदेही अदालत के समक्ष पेश हुए। वे इन दिनों जेल की सजा काट रहे हैं। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के 68 वर्षीय नेता अल-अजीजिया स्टील मिल्स और हिल मेटल इस्टेब्लिशमेंट मामलों में सुनवाई के लिए इस्लामाबाद की अदालत के समक्ष पेश हुए।

शरीफ अपनी बेटी मरियम (44) और अपने दामाद कैप्टन (सेवानिवृत्त) मोहम्मद सफदर के साथ रावलपिंडी की अदियाला जेल में क्रमश: 10 वर्ष, सात वर्ष और एक वर्ष की सजा काट रहे हैं। गत छह जुलाई को जवाबदेही अदालत ने इन लोगों को लंदन में परिवार के चार फ्लैट के स्वामित्व को लेकर दोषी ठहराया था। शरीफ को सुनवाई के लिए आज कड़ी सुरक्षा के बीच रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल से इस्लामाबाद की जवाबदेही अदालत लाया गया।

शरीफ के वकील ख्वाजा हारिस ने अदालत से दोनों मामलों में फैसला एक साथ सुनाए जाने की अपील की जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अभियोजन पक्ष ने अल अजीजिया स्टील मामले में आखिरी गवाह भी पेश किया जिसने शरीफ परिवार के बैंक खातों में हुए कई लेन-देन के विवरण उपलब्ध कराए। बाद में अदालत ने इस मामले की सुनवाई 27 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

शरीफ के कई समर्थक अपदस्थ प्रधानमंत्री के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अदालत के बाहर मौजूद थे। शरीफ पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाने की कोशिश करने वाले दो समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शरीफ की अर्जी पर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने सात अगस्त को शरीफ और उनके दो बेटों के खिलाफ भ्रष्टाचार के लंबित मामलों को न्यायाधीश मलिक की अध्यक्षता वाली दूसरी जवाबदेही अदालत को स्थानांतरित कर दिया था।

पिछले साल 28 जुलाई को उच्चतम न्यायालय के एक फैसले के बाद शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ उसी साल भ्रष्टाचार के तीन मामले दर्ज किए गए। शरीफ परिवार के खिलाफ औपचारिक मुकदमा 14 सितंबर को शुरू हुआ और छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी होनी थी लेकिन अंतिम तारीख तीन बार बढ़ाई गई। शरीफ के अलावा उनके दो बेटे- हसन और हुसैन भी भ्रष्टाचार के सभी तीन मामलों में सह आरोपी हैं। अदालत पहले ही नवाज के दोनों बेटों को उसके समक्ष पेश नहीं होने को लेकर भगोड़ा करार दे चुकी है। अधिकारियों ने उन्हें काली सूची में डाल दिया है जो उनके पाकिस्तानी पासपोर्ट पर उन्हें यात्रा करने देने से रोकती है।