कंपनियों को आरबीआई की ओर से स्पष्टीकरण का इंतजार 

बेंगलुरु। ग्लोबल पेमेंट कंपनियां सभी डेटा को भारत लाने की तय डेडलाइन मिस कर सकती हैं। इसके बारे में इंडस्ट्री अधिकारी ने बताया कि ये कंपनियां आरबीआई की तरफ से इस बात पर स्पष्टीकरण का इंतजार कर रही हैं कि क्या वे देश के बाहर डेटा स्टोर करना जारी रख सकती हैं या नहीं? जबकि इसके उल्टे आरबीआई चाहता है कि पेमेंट्स कंपनियां सिर्फ भारत में ही डेटा स्टोर करें। हालांकि, केंद्र सरकार इन कंपनियों को विदेश में डेटा स्टोरेज जारी रखने की अनुमति देने को तैयार दिख रही है, लेकिन शर्त यह है कि डेटा की एक कॉपी उन्हें भारत में स्टोर करनी होगी। आरबीआई ने इन कंपनियों को देश में डेटा स्टोरेज के लिए छह महीने का समय दिया था, जो इस अक्टूबर में खत्म हो रहा है। उधर,अभी तक रिजर्व बैंक की तरफ से मामले पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। 

एक पेमेंट कंपनी के बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, आरबीआई ने कहा था कि डेटा स्टोरेज पर स्पष्टीकरण के लिए एक नोट जारी किया जाएगा,जिसका हम अभी तक इंतजार कर रहे हैं। एग्जिक्यूटिव ने कहा, आरबीआई की 6 महीने की डेडलाइन में अब सिर्फ 2 महीने बचे हैं और इतने समय में सारे डेटा को भारत में स्टोर करना संभव नहीं है। अमेरिकन एक्सप्रेस, वीजा और मास्टरकार्ड के ऑपरेशन के बारे में इंडस्ट्री के एक अन्य एग्जिक्यूटिव ने बताया कि इनमें से ज्यादातर कंपनियों के पास सर्वर या डेटा सेंटर नहीं हैं। ग्लोबल पेमेंट कंपनियां भारत से फ्रॉड डिटेक्शन, वेरिफिकेशन और बहुत सारे दूसरे जांच का इस्तेमाल कर डेटा को स्टोरेज के लिए सिंगापुर,लंदन, अमेरिका और अन्य देशों में ले जाती हैं। एक अधिकारी ने बताया कि ग्लोबल कंपनियों के लिए भारत में सर्वर और डेटा सेंटर को बनाना काफी खर्चीला और समय लेने वाला होगा। उन्होंने बताया, 'ऐसा कोई तरीका नहीं है जिसके जरिए हम अगले दो महीने में डेटा स्टोरेज की शर्तों को पूरा कर सकें। देश की सबसे बड़ी कार्ड पेमेंट कंपनियों में शामिल वीजा और मास्टरकार्ड ने इस मामले में कोई जबाव नहीं दिया। भारत में अमेरिकी बिजनेस का लॉबिंग ग्रुप यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल ने भी इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। काउंसिल ने इस मामले पर पहले कई बार मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की थी। आरबीआई ने अप्रैल में कहा था कि सभी पेमेंट कंपनियों को अपने डेटा को सिर्फ भारत में स्टोर करना होगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिस्टम प्रोवाइडर्स के पास स्टोर डेटा तक किसी और का एक्सेस ना हो।