पटना। बिहार के समाज कल्याण विभाग ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस (टीआईएसएस) द्वारा सौंपी गई उस सामाजिक अंकेक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया है, जिसके आधार पर मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 लडकियों के यौन शोषण का खुलासा हुआ था। रिपोर्ट में इन बालगृहों की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया गया है। टीआईएसएस की रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर समेत 17 बालिकागृहों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। समाज कल्याण विभाग ने यह रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर जारी कर दी है। गत 27 अप्रैल को सौंपी गई चार खंडों की इस रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर जिले में स्वयंसेवी संगठन सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित बालिका गृह के साथ ही प्रदेश में संचालित कुल 17 अल्पावास गृह, आश्रय गृह एवं बाल गृहों की स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है।

रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर बालिका गृह के साथ ही मोतिहारी में 'निर्देश' द्वारा संचालित बाल गृह, भागलपुर में 'रूपम प्रगति समाज समिति' द्वारा संचालित बाल गृह, मुंगेर में 'पनाह' द्वारा संचालित बाल गृह, गया में 'डोर्ड' द्वारा संचालित बाल गृह, अररिया में सरकार द्वारा संचालित बाल संप्रेक्षण गृह, पटना में इकार्ड द्वारा संचालित अल्पावास गृह, मोतिहारी में 'सखी' द्वारा संचालित अल्पावास गृह का भी नाम लिया गया है। इसके अलावा मुंगेर में 'नोवेल्टी वेल्फेयर सोसाईटी' द्वारा संचालित अल्पावास गृह, मधेपुरा में 'महिला चेतना विकास मंडल द्वारा संचालित अल्पावास गृह, कैमूर में 'ग्राम सेवा स्वराज संस्था' द्वारा संचालित अल्पावास गृह, मुजफ्फरपुर में ओम साई फाउंडेशन द्वारा संचालित सेवा कुटीर , गया में 'मेटा बुद्धा ट्रस्ट' द्वारा संचालित सेवा कुटीर और पटना में डानबोस्को टेक सोसाईटी द्वारा संचालित कौशल कुटीर तथा तीन एडोपशन एजेंसी पटना के नारी गुंजन, मधुबनी के रवेस्क और कैमूर के ज्ञान भारती का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन स्थानों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।