मध्य प्रदेश के आईपीएस अफसर मयंक जैन को भारत सरकार ने नौकरी से हटा दिया है. उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गयी है. मयंक जैन फिलहाल निलंबित थे. मामला आय से अधिक संपत्ति का है.


मध्य प्रदेश के आईपीएस ऑफिसर मयंक जैन के खिलाफ 2015 में लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की थी.  आय से अधिक संपत्ति के मामले की शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने 15 मई 2015 को उनके खिलाफ कार्रवाई की थी. मयंक जैन के भोपाल, इंदौर और रीवा स्थित निवास पर लोकायुक्त पुलिस ने एक साथ छापा मारा था. उसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. अब भारत सरकार ने तीन साल बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया है.


मयंक जैन 1995 बैच के आईपीएस अफसर हैं. वह एमबीबीएस में गोल्ड मेडलिस्ट है. जिस वक्त उनके खिलाफ कार्रवाई हुई, वो आईजी सामुदायिक पुलिसिंग के पद पर पदस्थ थे. लोकायुक्त पुलिस ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था. नौकरी में रहते हुए उनकी तय आय से सवा करोड़ रुपए की संपत्ति होनी चाहिए थी. लेकिन मयंक जैन के पास लगभग 100 करोड़ की संपत्ति मिली थी.


छापे के दौरान मयंक जैन के भोपाल और इंदौर के पॉश इलाकों में तीन आलीशान फ्लैट, सीमेंट मिक्सिंग प्लांट, नर्सिंग होम्स, लाखों के ज़ेवर, कैश, ज़मीन और कई बैंक खातों और लॉकर का पता चला था.


राज्य सरकार ने इसी साल 3 मार्च को उन्हें अनिवार्य सेवा निवृत्ति देने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था, जिसे भारत सरकार के गृह विभाग ने 13 अगस्त को मंजूर कर राज्य सरकार को सूचना भेज दी है. तीन साल से अधिक समय बाद भी लोकायुक्त पुलिस उनके खिलाफ चालान पेश नहीं कर सकी है. इसके बाद भी उन्हें अनिवार्य सेवा निवृत्ति दे दी गई.