नई दिल्ली: वैसे तो विराट कोहली का रिकॉर्ड इंग्लैंड में अच्छा नहीं हैं अभी तक केवल बर्मिंघम में विराट कोहली ने एक शतक और एक अर्धशतक लगाया है. उससे पहले 2014 के पांचों टे्स्ट मैचों में उनका रिकॉर्ड खराब ही रहा है. विराट कोहली ने जब इस साल इंग्लैंड दौरे के पहले टेस्ट मैच में कुल 200 रन बनाए थे तब उनसे उम्मीद की जा रही थी कि अब वे इंग्लैंड के बाकी मैदानों में भी अपना रिकॉर्ड सुधार देंगे. लेकिन लॉर्ड्स टेस्ट में विराट केवल 32 और 17 रन बना सके जबकि 2014 के लॉर्ड्स टेस्ट में विराट ने 25 रन और शून्य रन बनाए थे इस मैच में भारत ने 95 रनों से जीत हासिल की थी. 


अब इस शनिवार को विराट के सामने एक बार फिर इंग्लैंड की चुनौती है लेकिन इस बार मैदान नॉटिंघम के टेंट ब्रिज होगा. लेकिन उससे पहले विराट के  सामने पहले अपनी फिटनेस की चुनौती है, पीठ दर्द से निपटने की चुनैती है. लॉर्ड्स टेस्ट के चौथे दिन विराट पहले सत्र में मैदान में दिखाई नहीं दिए थे. तभी उनके पीठ दर्द के बारे में पता चला था. दूसरे सत्र में वे बल्लेबाजी करने जरूर आए लेकिन केवल 17 रन बनाकर चल दिए थे. अभी तक उनके तीसरे टेस्ट के लिए फिट होने की पुष्टि नहीं की गई है.


अगर मान कर चला जाए कि विराट नॉटिंघम टेस्ट से पहले फिट हो जाएंगे तो उनके पास अपना पुराना रिकॉर्ड सुधारने का मौका और चुनौती दोनों होंगी.  विराट ने साल 2015 के नॉटिंघम टेस्ट की पहली पारी में 1 और दूसरी पारी में 8 रन बनाए थे. इस मैच में मुरली विजय ने पहली पारी में 146 रनों की पारी खेली थी. यह मैच ड्रॉ हो गया था. 

टेंट ब्रिज की पिच पर भी गेंद  को भरपूर स्विंग मिलती है. जिसके आगे अभी तक टीम इंडिया बुरी तरह से नाकाम रही है. विराट के सामने इस समय अपने साथ साथ कई चुनौतियां हैं.  टीम का शीर्ष क्रम और मध्य क्रम, उन्हें छोड़ कर बुरी तरह से नाकाम है. आलम यह है कि अब तो विराट के सामने यह समस्या आ गई है कि नॉटिंघ टेस्ट में प्लेइंग इलेवन के लिए किसका चयन करें किसका नहीं क्योंकि उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं और जो हैं वे दूसरों क मुकाबले कोई बहुत खास या मजबूत नहीं है. 


भारतीय बल्लेबाजी का यह रहा है अब तक का हाल

पहले टेस्ट में  26 और 13 रन बनाने वाले शिखर धवन को बाहर कर चेतेश्वर पुजारा को लाए तो वे भी नाकाम हो गए. पुजारा लॉर्ड्स टेस्ट में केवल 11 और 17 रन ही बना सके. वहीं केएल राहुल जो पहली बार इंग्लैंड में कोई टेस्ट सीरीज खेल रहे हैं, इंग्लैंड में चार पारियों में 4,13, 8 और 10 ही बना सके. विराट ने केएल पर काफी भरोसा जताया था. इसके अलावा 2014 की सीरीज में इंग्लैंड में पहले ही  टेस्ट में 146 रनों की पारी खेलने वाले मुरली विजय तो दूसरे टेस्ट की दोनों ही पारियों में शून्य पर आउट हो गए जबकि पहले टेस्ट में वे 26 और 6 रन ही बना सके थे. 


विराट को इस बार यह भी साबित करना होगा कि टीम चयन के लिए उनके फैसले सही होते हैं. लॉर्ड्स टेस्ट में पहले दिन बारिश के बाद भी एक तेज गेंदबाज छोड़कर स्पिनर कुलदीप यादव का चयन लोगों को हजम नहीं हो पाया है. वहीं पहले टेस्ट में शिखर धवन को बाहर करना और चेतेश्वर पुजारा को लाना दोनों ही फैसले को विराट खुद नहीं समझ पा रहे होंगे कि वे कितने सही थे. विराट के सामने चयन से पहले अपनी लीडरशिप स्किल का उपयोग कर टीम में उत्साह भरने की चुनौती होगी.