नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक सबसे निचले स्तर पर है. गुरुवार को रुपया 29 पैसे की गिरावट के साथ 70.31 के स्तर पर पहुंच गया. रुपया की रिकॉर्ड गिरावट से सरकार चिंतित नहीं है. सरकार का मानना है कि विदेशी कारणों के चलते रुपये में रिकॉर्ड गिरावट आ रही है. वहीं, आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी रुपये को लेकर बयान दिया है. उन्होंने एक इंटरव्यू में रुपये के गिरने के कारणों पर चर्चा की. साथ ही बताया कि कैसे रुपये में सुधार आ सकता है. 


रघुराम राजन ने बताया क्यों गिर रहा है रुपया

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में रुपये की गिरावट पर बयान दिया है. रघुराम राजन का कहना है कि रुपये में गिरावट चिंता का विषय नहीं है. उन्होंने कहा कि एमर्जिंग मार्केट्स के हालात 2013 के मुकाबले काफी अच्छे हैं. इसलिए रुपये के गिरने से कोई खतरा नहीं है. दरअसल, भारत में महंगाई दर दुनिया के मुकाबले ज्यादा है, ऐसे में रुपये में थोड़ी और कमजोरी देखने को मिल सकती है. उन्होंने कहा कि हालात बेहतर होने के लिए रुपये में और कमजोरी आनी चाहिए.


टर्की संकट पर बोले रघुराम राजन

रघुराम राजन ने टर्की संकट पर बात करते हुए कहा कि खराब नीतियों की वजह से टर्की में आर्थिक संकट गहरा रहा है. सिर्फ टर्की ही नहीं कई और देशों की हालत भी नाजुक है. टर्की में करेंसी संकट बढ़ने का अभी भी डर है. डॉलर इंडेक्स की ऊंचाई और अमेरिका के फैसले से टर्की में यह हालात बने हैं. दरअसल, टर्की के मेटल इंपोर्ट पर ड्यूटी को अमेरिका ने दोगुनी कर दिया है, जिसकी वजह से करेंसी मार्केट में हड़कंप है. अमेरिका के इस कदम से टर्की की करेंसी लीरा अब तक 40 फीसदी टूट चुकी है. वहीं, डॉलर इंडेक्स 14 महीने की ऊंचाई पर है.


करेंसी मार्केट में हड़कंप

टर्की और यूरोप के अलावा रुपये में गिरावट से करेंसी मार्केट में हड़कंप मचा है. यही वजह है कि मंगलवार को रुपया ने 70.31 के ऑलटाइम लो पर पहुंच गया है. हालांकि, भारतीय सरकार का कहना है कि रुपया विदेशी कारणों की वजह से गिर रहा है, इसमें चिंता की कोई बात नहीं है. आर्थिक मामलों की सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि विदेशी संकट आगे सामान्य हो जाएंगे. इससे रुपये की स्थिति में सुधार होगा.


10 फीसदी टूट चुका है रुपया

साल 2018 में रुपया अब तक 10 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. रुपया इस साल की शुरुआत से लगातार कमजोर हो रहा है. हालांकि, बीते साल रुपए ने डॉलर की तुलना में 5.96 फीसदी की मजबूती दर्ज की थी. वहीं, इस महीने डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक 1.84 रुपए टूट चुका है.


क्यों गिर रहा है रुपया

बाजार के जानकारों की मानें तो अमेरिका और चीन में ट्रेड वॉर से ऑयल इम्पोर्टर्स के बीच डॉलर की डिमांड बढ़ी, जिससे रुपए पर दबाव बना. अगले महीने अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की भी उम्मीद हैं. इससे डॉलर को लगातार मजबूती मिल रही है. यूरोपीयन करंसी में भी स्लोडाउन आने से अन्य करंसी के मुकाबले डॉलर में मजबूती आ रही है. यही वजह है जिससे रुपया गिर रहा है.