यह पहली बार होगा जब एक नक्सली दस्ता तिरंगे को सलाम करेगा। यह सलामी घाटशिला जेल में दी जाएगी। सलामी देने वाला और कोई नहीं बल्कि नक्सलियों का बड़ा कमांडर मंगल उर्फ कान्हू मुंडा और उसकी टीम होगी। कान्हू मुंडा 25 लाख का इनामी नक्सली था। वह गुड़ाबांधा दस्ते का कमांडर था। उसने 15 फरवरी 2017 को सात साथियों के साथ सरेंडर किया था।.

समाज की मुख्यधारा से भटके नक्सली हर साल स्वतंत्रता दिवस पर कई जगहों पर काला झंडा फहराते हैं। 15 अगस्त 2016 को बाकड़ाकोचा में मंगल के दस्ते के साथ पुलिस की आखिरी मुठभेड़ हुई थी। यह मंगल और पुलिस के बीच आखिरी मुठभेड़ थी। उसके बाद ही उसने आत्समर्पण का मन बनाया था क्यों कि उस दिन बाकड़कोचा में मंगल पुलिस के निशाने पर आकर बच गया था। .

कान्हू मुंडा से मिलने गए थे एएसपी
शनिवार को कान्हू मुंडा और उसके दस्ते के सदस्यों से मिलने के लिए एएसपी प्रणवानंद और पुलिस पदाधिकारी गए थे। उन्होंने मंगल से बात की। मंगल ने कहा कि वह जेल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होगा। मंगल ने पुलिस को बताया कि देशहित सर्वोपरि है। काला झंडा फहराना गलत है। लोगों की सेवा करनी है तो मुख्यधारा में आना होगा।.

7 ने किया था सरेंडर
भाकपा माओवादी रिजनल कमेटी के सचिव कान्हू मुंडा उर्फ मंगल के साथ फोगड़ा मुंडा, चुनु मुंडा, भोगलू सिंह सरदार, जीतेन सिंह सरदार, शंकर मुंडा और उसकी पत्नी काजल मुंडा ने सरेंडर किया था। उनके सरेंडर के साथ ही 22 साल बाद गुड़ाबांधा नक्सल मुक्त हो गया है। .

अनूप बिरथरे (एसएसपी पूर्वी सिंहभूम) ने कहा कि यह एक बेहतर शुरुआत है। नक्सलियों के पास मुख्यधारा में आने के सिवा अब कोई विकल्प नहीं बचा है।