सरस्वती पुराण और मत्स्य पुराण में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा का अपनी ही पुत्री से सरस्वती से विवाह करने का प्रंसग है जिसके परिणाम स्वरूप इस धरती पर मनु का जन्म हुआ। लेकिन ब्रह्मा ने एेसा काम क्यों किया इसके बारे में शायद ही किसी को पता होगा। पुराणों में इसके बार में भिन्न-भिन्न प्रकार की कथाएं पड़ने को मिलती है। आईए जानें इन प्रसंगों के बारे में-


सरस्वती पुराण में वर्णित कथा

इस पुराण के अनुसार सृष्टि की रचना करते समय ब्रह्मा ने सीधे अपने वीर्य से सरस्वती को जन्म दिया था। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि सरस्वती की कोई मां नहीं केवल पिता, ब्रह्मा थे।


इन्हें विद्या की देवी कहा जाता है, लेकिन विद्या की यह देवी बेहद खूबसूरत और आकर्षक थीं। स्वयं ब्रह्मा भी सरस्वती के आकर्षण से खुद को बचा नहीं पाए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाने पर विचार करने लगे।सरस्वती ने अपने पिता की इस मनोभावना को भांपकर उनसे बचने के लिए चारों दिशाओं में छिपने का प्रयत्न भी किया लेकिन उनका कोई भी प्रयत्न सफल न हो सका।  इसलिए विवशता वश उन्हें अपने पिता के साथ विवाह करना पड़ा।


ब्रह्मा और सरस्वती करीब 100 वर्षों तक एक जंगल में पति-पत्नी की तरह रहें। इन दोनों का एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम रखा गया था स्वयंभु मनु।


मत्स्य पुराण में वर्णित कथा

इसके उलट मत्स्य पुराण के अनुसार ब्रह्मा के पांच सिर थे। कहा जाता है जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो वह इस समस्त ब्रह्मांड में अकेले थे। ऐसे में उन्होंने अपने मुख से सरस्वती, सान्ध्य, ब्राह्मी को उत्पन्न किया। ब्रह्मा अपनी ही बनाई हुई रचना, सरवस्ती के प्रति आकर्षित होने लगे और लगातार उन पर अपनी दृष्टि डाले रखते। ब्रह्मा की दृष्टि से बचने के लिए सरस्वती चारों दिशाओं में छिपती रहीं लेकिन वह उनसे नहीं बच पाईं। इसलिय माता सरस्वती आकाश में जाकर छिप गईं लेकिन अपने पांचवें सिर से ब्रह्मा ने उन्हें आकाश में भी खोज निकाला और उनसे सृष्टि की रचना में सहयोग करने का निवेदन किया।सरस्वती से विवाह करने के पश्चात सर्वप्रथम मनु का जन्म हुआ। ब्रह्मा और सरस्वती की यह संतान मनु को पृथ्वी पर जन्म लेने वाला पहला मानव कहा जाता है। इसके अलावा मनु को वेदों, सनातन धर्म और संस्कृत समेत समस्त भाषाओं का जनक भी कहा जाता है।