भोपाल। महिला संबंधी सायबर अपराध को रोकने के लिए सेंट्रलाइज्ड ऑनलाइन रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cyberpolice.gov.in) बनाया गया है। इसके जरिए इंटरनेट पर दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और बच्चों के पोर्नोग्राफी संबंधी वीडियो वायरल होने से रोका जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन ही शिकायतदर्ज करनी होगी। इसके बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए ऐसे वीडियो को तुरंत रोककर इंटरनेट से हटाया जा सकेगा।


पुलिस मुख्यालय में डीजीपी आरके शुक्ला ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम प्रिवेन्शन फॉर वुमन एंड चाइल्ड स्कीम (सीसीपीडब्ल्यूसी) का शुभारंभ किया। योजना के तहत ऐसा सेटअप बनाया जा रहा है, जिसमें आम लोग साइबर क्राइम की शिकायतों को ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।


योजना के तहत वर्ष 2018 से 2020 तक पुलिस अधिकारियों, लोक अभियोजकों व न्यायिक अधिकारियों को साइबर क्राइम का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही फॉरेंसिक साइबर प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जाएंगी।


पुलिस मुख्यालय में बुधवार से इस योजना का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। इसमें मास्टर ट्रेनर्स साइबर क्राइम के संबंध में प्रशिक्षण देंगे। यहां बताया गया कि प्रदेश के 1100 सिपाही व उप निरीक्षकों को साइबर अपराध जागरूकता, 650 पुलिस निरीक्षकों को साइबर क्राइम अपराध विवेचना, 350 लोक अभियोजकों व इतने ही न्यायिक अधिकारियों को साइबर क्राइम व साइबर कानून जागरूकता का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


इस मौके पर डीजी लोक अभियोजना राजेंद्र कुमार ने कहा कि पुलिस और लोक अभियोजक के बीच अच्छा सामंजस्य होने से अपराधों में आरोपियों को ज्यादा सजा मिल सकेगी।


एडीजी साइबर मुकेश जैन ने कहा कि तकनीक के विकास के साथ ही चुनौतियां भी बढ़ी हैं। पहले हैकिंग एवं वायरस को ही साइबर क्राइम समझा जाता था, जो वर्तमान में बहुत आगे जाकर और गंभीर होता जा रहा है जैसे डाकनेट, क्रिप्टो करेंसी सहित कई गंभीर साइबर क्राइम होने लगे हैं। इस परिदृश्य में साइबर क्राइम जागरूकता के साथ इससे लड़ने के लिए सिस्टम को कुशल बनना होगा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजेश गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं सभी जिलों से आए लोक अभियोजक उपस्थित थे।