ईरान ने भारत को चाबहार बंदरगाह में वादे के मुताबिक निवेश ना करने और तेल के आयात में कटौती को लेकर चेतावनी दी है. ईरान ने कहा है कि अगर भारत यूएस के दबाव में आकर तेल के आयात में कमी करता हो तो फिर वह भारत को दिए गए विशेषाधिकार छीन लेगा.

उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चाबहार बंदरगाह के विस्तार के लिए भारत वादे के मुताबिक निवेश करने में असफल रहा है. भारत से उम्मीद की जाती है कि वह इस संबंध में जरूरी कदम उठाएगा क्योंकि चाबहार बंदरगाह में उसका सहयोग और भागीदारी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है.

रहागी एक सेमिनार में 'वैश्विक राजनीति में उभरती चुनौतियां-अवसर और भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर असर' विषय पर बोल रहे थे.

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए कारोबार से लेकर रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है. ओमान की खाड़ी के इस बंदरगाह की मदद से भारत पाकिस्तान का रास्ता बचा कर ईरान और अफगानिस्तान के साथ व्यापार कर सकता है.

यूएस के ईरान से तेल आयात करने को लेकर लगाए गए प्रतिबंध की तरफ इशारा करते हुए रहागी ने कहा कि उनका देश भारत का विश्वसनीय ऊर्जा साझेदार रहा है और ईरान ने हमेशा से हमेशा से उपभोक्ताओं और आपूर्तिकर्ताओं के हितों के ध्यान में रखते हुए उचित कीमत में तेल की आपूर्ति की है.

रहागी ने कहा, 'अगर भारत तेल आपूर्ति के लिए ईरान को सऊदी अरब, रूस, ईराक और यूएस से रिप्लेस करने की कोशिश करता है तो फिर उसे डॉलर से आयात करना होगा जिसका मतलब होगा कि भारत का चालू अकाउंट घाटा बढ़ेगा. इसके अलावा ईरान ने भारत को जो विशेष लाभ दिए हैं, वह भी वापस ले लेगा.'

ईरान के वरिष्ठ राजदूत ने कहा कि दोनों देशों को रिश्ते को मजबूत करने के लिए कोशिश करनी होगी, इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत होगी.

इराक और सऊदी अरब के बाद ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश है. ईरान ने अप्रैल 2017 और जनवरी 2018 के बीच 18.4 mn कच्चे तेल की आपूर्ति की.

बता दें कि यूएस ने भारत समेत अन्य देशों से 4 नवंबर तक ईरान से तेल का आयात शून्य करने के लिए कहा है. ऐसा नहीं करने पर अमेरिका ने प्रतिबंध झेलने की चेतावनी दी है.

रॉयटर्स एजेंसी के मुताबिक, यूएस के ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद से जून महीने में भारत के ईरान से तेल आयात में 15.9 फीसदी की कमी आई है. जून महीने में भारत ने ईरान से प्रतिदिन 592800 बैरल तेल का आयात किया जबकि मई महीने में यह 705,200 बैरल प्रतिदिन था.

भारत के बाद चीन ईरान का सबसे बड़ा क्लाइंट है. भारत ने रिफाइनरियों से तेहरान से तेल आयात में कटौती के लिए अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए कहा है.

रहागी ने कहा, 'भारत से उम्मीद की जाती है कि वह यूएस को चाबहार बंदरगाह की अहमियत समझाए. चाबहार अफगानिस्तान में व्यापार का प्रमुख लिंक हो सकता है. अपने स्वार्थ में यूएस पूरे विश्व को टारगेट कर रहा है, चाहे उसके दोस्त हों या दुश्मन. यूएस को डरा-धमकाकर या ताकत का इस्तेमाल करने की नीति छोड़ देनी चाहिए.'

चाबहार बंदरगाह भारत-ईरान की मजबूत आर्थिक साझेदारी का प्रतीक है. इस बंदरगाह से भारत की अफगानिस्तान तक पहुंच हो जाएगी. चाबहार बंदरगाह से भारत ईरान से प्राकृतिक गैस का आयात भी करेगा.

भारत के रणनीतिकार चाबहार बंदरगाह को चीन के पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के जवाब के तौर पर भी देखते हैं.

इसके अलावा भारत अपनी मुद्रा रुपए में ईरान से तेल का आयात करता है. ईरान-भारत के बीच रुपए-रियाल व्यापार व्यवस्था है. इस लिहाज से ईरान भारत के लिए काफी अहम है.