जबलपुर। भगवान जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा शहर में सैकड़ों वर्ष पुरानी है। करीब 150 वर्ष पहले जगदीश मंदिर गढ़ा फाटक से रथयात्रा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद करीब 129 वर्ष से घमंडी चौक जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा निकाली जा रही है। मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होने के बाद प्रजा का हाल जानने रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। 14 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शहर के विभिन्न मंदिरों से निकाली जाएगी। मंदिरों से निकलने के बाद भगवान के रथ बड़ा फुहारा में एकत्रित होंगे।


जगदीश मंदिर, गढ़ा फाटक


- 500 साल प्राचीन मंदिर।


- 150 साल से रथयात्रा निकाली जा रही है।


- एक क्विंटल मीठे भात का प्रसाद बांटा जाएगा।


- नगर भ्रमण के बाद रथयात्रा का जगदीश मंदिर में ही विश्राम होगा।


जगन्नाथ मंदिर, बड़ा फुहारा घमंडी चौक


- 150 साल प्राचीन मंदिर।


- 129 साल से रथयात्रा निकाली जा रही है।


- 13 को नेत्रोत्सव में भगवान के श्रंगार दर्शन होंगे।


- नगर भ्रमण के बाद सिंहवाहिनी मंदिर बड़ी खेरमाई में विश्राम।


- पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण एक दिन पहले 26 जुलाई को भगवान की वापसी होगी।


जगदीश मंदिर, हनुमानताल


- 1870 में मंदिर की स्थापना।


- 120 साल से रथयात्रा निकाली जा रही है।


- 11 को दवाएं दी जाएंगी, जिसमें हाथों से पीस कर ठंडाई (काजू, किसमिस, तुलसी, कालीमिर्च आदि को दूध में मिलाकर) का भोग लगाया जाता है।


- 12 को खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा।


- 13 को नेत्रोत्सव में श्रंगार दर्शन होंगे।


- नगर भ्रमण के बाद कटरा वाले महावीर मंदिर में 15 दिन विश्राम।


जगन्नाथ रथयात्रा, बंगाली क्लब


- 1962 में बंगाली महिला मंडल ने अग्रवाल कॉलोनी से की थी रथयात्रा की शुरुआत।


- 1967 से बंगाली क्लब से निकाली जाने लगी रथयात्रा।


- बैंडबाजों की जगह यहां की रथयात्रा में खोल बजाने की परंपरा है।


- रथ की वापसी 22 जुलाई को होगी।


- बंगाली क्लब में ही मौसी का घर बनाया जाता है।


जगन्नाथ मंदिर, खमरिया


- 1 जनवरी 2018 को भगवान जगन्नाथ की प्राण प्रतिष्ठा।


- 14 जुलाई को पहली बार मंदिर से निकलेगी रथयात्रा।


- रथयात्रा में बजेंगे घंटे और शंख।


- 22 जुलाई को होगी भगवान की वापसी।


- दस दिवसीय आयोजन 13 से शुरू।