इंदौर में तेजी से बढ़ रहे अपराधों का एक कारण पुलिसकर्मियों द्वारा फोन नहीं उठाना है. थानों में पदस्थ टीआई न तो लोगों के फोन उठाते हैं और न ही थानों में बैठते हैं. ऐसे में समय रहते आपराधिक घटना की सूचना नहीं मिल पाती, जिससे अपराध कारित होते हैं. पुलिस के इसी रवैये को देखते हुए एडीजी ने फोन नहीं उठाने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई करने का फैसला लिया है.


इंदौर में अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस को सक्रिय रहने की हिदायत दी गई है, साथ ही अब फोन नहीं उठाने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी. एडीजी अजय शर्मा ने बताया कि लगातार पुलिस थाने और पुलिसकर्मियों द्वारा फोन नहीं उठाने की शिकायतें मिल रही थी.


पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली पर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने तीन दिनों का सर्वे कराया, जिसके तहत अंजान नंबर्स से पुलिसकर्मियों और थाना प्रभारियों को फोन लगवाए गए, जिसमें 40 फीसदी टीआई और 20 फीसदी पुलिसकर्मियों के फोन नहीं उठाने का मामला सामने आया है, वहीं विभिन्न थानों पर 18 टीआई नदारद मिले.


फोन नहीं उठाने के पीछे थाना प्रभारी विभिन्न तर्क दे रहे हैं. थाना प्रभारियों का कहना है कि हरसमय फोन उठाना संभव नहीं होता, खासतौर पर जब वे वीआईपी ड्यूटी पर रहते हैं, तो रिटर्न कॉल करना संभव नहीं हो पाता और इतने कॉल आ जाते हैं कि सभी को जवाब देना संभव नहीं हो पाता. बहरहाल लोगों की शिकायतें टालने के लिए पुलिस विभाग हमेशा बदनाम रहता है, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है.