आरएसएस ने मोदी सरकार के रोजमर्रा के कामकाज में दखल देने से भले परहेज बरता हो, लेकिन अहम मुद्दों पर उसने अपना रुख साफ कर दिया. मीडिया में ऐसी कई रिपोर्टें आईं जिनमें कहा गया है कि आरएसएस मोदी सरकार के कामकाज को लेकर नाखुश है. सरकार से नाराजगी का संघ के पास अपना तर्क है. संघ को लगता है कि कुछ फैसलों को और बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता था, जो नहीं हो पाया.

 आरएसएस मानता है कि जीएसटी को कहीं बेहतर ढंग से लागू किया जा सकता था और सरकार मध्यम वर्ग तथा छोटे व्यापारियों को नाराज करने से बच सकती थी, जिन्होंने 2014 में भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाई थी. लघु उद्योग भारती ने सरकार को जीएसटी में सुधार और लघु तथा मझोले उद्यमों की परिभाषा विस्तृत करने के लिए बाध्य किया.

स्वदेशी जागरण मंच ने मुक्त व्यापार समझौते का पुराना प्रारूप समाप्त कराया क्योंकि उसका मानना था कि इससे भारतीय उद्योगों को नुकसान पहुंच रहा था.

जिस एक और मामले में आरएसएस ने सरकार के कामकाज को कमतर पाया, वह कश्मीर था. 16 जून को जब प्रधानमंत्री मोदी अपने साथियों के साथ आरएसएस के आला कर्ताधर्ताओं से मिले, तब कश्मीर के हालात पर बात हुई. पीडीपी से अलग होने का फैसला सबसे पहले यहीं लिया गया. कश्मीर की स्थिति से नाखुश आरएसएस भाजपा को जनवरी महीने से ही पीडीपी के साथ गठजोड़ खत्म करने को कह रहा था.

एयर इंडिया को किसी भारतीय कंपनी को ही बेचा जाना चाहिए, मोहन भागवत की इस मांग के एक हफ्ते के भीतर उड्डयन मंत्रालय ने शर्तें बदल कर भारतीय कंपनियों के लिए इसे कहीं ज्यादा आकर्षक बना दिया. भागवत खुद चाहते हैं कि एयर इंडिया को विदेशी कंपनी को न बेचा जाए.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ-साथ शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने नई शिक्षा नीति को लेकर टी.एस.आर. सुब्रह्मण्यम कमेटी की सिफारिशों को खारिज कर दिया, केंद्र को एक नया पैनल बनाना पड़ा.

संघ के निर्देशों के अनुसार सरकार यूजीसी, एआइसीटीई और एनसीटीई का पुनर्गठन करके उसे एक छतरी के नीचे लाने की तैयारी कर रही है.

पिछली मई में स्वदेशी जागरण मंच ने कई जीवनरक्षक दवाओं और महत्वपूर्ण मेडिकल उपकरणों की कीमतों पर अंकुश रखने वाली संस्था राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को समाप्त करने की कोशिशों पर विराम लगवा दिया.

स्वदेशी जागरण मंच और भारतीय किसान संघ ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलों के नैदानिक परीक्षण पर रोक लगवा दिया.

संस्कृत का पुनरुद्धार संघ के एजेंडे में बहुत ऊपर है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 2016 में सभी आईआईटी और आईआईएम को कहा कि वे संस्कृत में वैकल्पिक भाषा पाठ्यक्रम प्रदान करें. जनवरी 2018 में, आईआईटी कानपुर ने संस्कृत और हिंदू ग्रंथों से संबंधित पाठ और ऑडियो सेवाएं शुरू भी कीं.

मोदी सरकार को आरएसएस की इस मांग पर भी अमल करना है कि बच्चे के विकास में बड़ी भूमिका निभाने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तनख्वाह इतनी बढ़ाई जाए ताकि वे सम्मानजनक जिंदगी बसर कर सकें.

सरकार के श्रम सुधारों ने भी भारतीय मजदूर संघ की आलोचना को आमंत्रित किया है. खेती और कृषि के क्षेत्र में आरएसएस ने फसल बीमा योजना और फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे बीजेपी के सामने उठाए थे. न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार ने बदलाव भी कर दिए.

विदेश नीति के मोर्चे पर मोदी ने जिस तरह चीन को संभाला, 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित करने के अपने सुझाव को संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी दिलवाकर विश्व मंचों पर जिस तरह भारत की इज्जत बढ़ाई और भारत की उपलब्धियों के प्रति प्रवासी भारतीयों के मन में गौरव की भावना जगाकर भारत की सॉफ्ट पावर में जिस तरह इजाफा किया, इस सबसे आरएसएस कुल मिलाकर खुश है.

अलबत्ता आरएसएस अब भी चाहता है कि पाकिस्तान की ढुलमुल सियासी फितरत को ध्यान में रखते हुए इस पड़ोसी मुल्क के बारे में लंबे वक्त का एक सिद्धांत विकसित किया जाए.

आरएसएस के भीतरी लोग कहते हैं कि टकराव के कुछेक मुद्दों को छोड़कर संघ मोदी सरकार की नीतियों से मोटे तौर पर संतुष्ट है.