नई दिल्ली। अधिकारों की जंग लेकर दिल्ली सरकार की अपील पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी और केन्द्र के बीच फिर से जंग शुरू हो गई है। गुरूवार को केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने ब्लॉग पर लिखते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में विस्तार से समझाते हुए अपना तर्क दिया है। 

उन्होंने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कानून के मुताबिक 4 जुलाई 2018 को विधि संबंधी और कार्यपालिका संबंधी अधिकारों को लेकर केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली और उपराज्यपाल के दायरे को बताया है। इसमें तीन फैसले दिए गए। सबसे बड़ा फैसला प्रधान न्यायाधीश का था जिनसे दो जज सहमत थे। सैद्धांतिक तौर पर सभी पांच जजों की राय में थोड़ा सा ही अंतर था। 

जेटली ने आगे कहा कि दिल्ली निर्विवाद तौर पर एक केन्द्र शासित प्रदेश है। लिहाजा यहां का अधिकार अलग और स्पष्ट है। यहां पर केन्द्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रपति भवन, केन्द्र सरकार के कार्यलयों, राष्ट्रपति भवन, विदेश के सारे दूतावास हैं। विदेश के प्रमुखों के लगातार यहां दौरे होते रहते हैं। 

इसलिए, यहां की पुलिस, पब्लिक ऑर्डर और लैंड केन्द्र के नियंत्रण में है। जबकि, कई अन्य चीजें सरकार के अधिकार क्षेत्र में दिए गए हैं। ऐसे में संविधान के आर्टिकल 239 एए में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सुरक्षा का अधिकार साफतौर पर केन्द्र को दिया गया है। और राज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी में सुचारू शासन सुनिश्चित करने का यह जिम्मा राज्यपाल को दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अदालत ने बिल्कुल ठीक आकलन किया है कि तीन संस्थाओं को निर्वाचित सरकार, एलजी और केन्द्र सरकार को लोगों और राष्ट्रीय राजधानी को ध्यान में रखकर आपसी तालमेल के साथ काम करना चाहिए। उनके बीच किसी तरह के विवाद का उद्देश्य नहीं होना चाहिए।