हमारे पुराणों और ग्रंथों में ‘कैलास पर्वत’ को भगवान शंकर और मां पार्वती का निवास स्‍थान बताया गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार शिवजी अपने सभी गणों के साथ इस अलौकिक स्थान पर रहते हैं। शिवपुराण के अनुसार, कैलास धन के देवता और देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर की तपस्थली है। उन्हीं की तपस्या से प्रसन्न होकर भोले भंडारी ने कैलास पर निवास करने का वचन दिया था। इस स्थान को ही कुबेर देवता की अलकापुरी की संज्ञा दी जाती है…

कैलास पर्वत का मनोरम दृश्य यात्रियों का मन मोह लेता है। कैलास पर्वत के चारों तरफ पर्वतमाला है और सभी पर्वत सफेद चमचमाते बर्फ से ढके रहते हैं। इनका मनोरम दृश्य ऐसा लगता है मानों सफेद कमल खिला हुआ है, जिसकी 8 पंखुड़ियां हैं। इस पर्वत का बाहरी परिक्रमापथ करीब 62 किलोमीटर का है।

कैलास पर्वत का जिक्र केवल हिंदू धर्मग्रंथों में ही नहीं बल्कि बौद्ध और जैन धर्मग्रंथों में भी मिलता है। सनातन धर्म के शिव पुराण और अन्य शिव स्तुति ग्रंथों को छोड़कर रामायण और महाभारत ग्रंथों में कैलास पर्वत का जिक्र प्रमुखता के साथ मिलता है। मानसरोवर झील के रास्ते में ही एक और झील है, जिसे क्षीर सागर कहा जाता है। क्षीर सागर को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का निवास माना जाता है।

कैलास मानसरोवर यात्रा का आयोजन हर साल जून माह में किया जाता है। इस बार 8 जून से यात्रा शुरू हुई है। भारत एवं चीन गणराज्य के विदेश मंत्रालयों द्वारा जून के प्रथम सप्ताह से सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक कुमायूं मण्डल विकास निगम एवं भारत तिब्बत सीमा पुलिस के सहयोग से यह यात्रा आयोजित की जाती है। यात्रा के लिए फरवरी से मार्च माह में विदेश मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दूरदर्शन, रेडियो तथा प्रमुख राष्ट्रीय समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।

आवेदन के साथ स्वास्थ्य प्रमाणपत्र तथा पासपोर्ट की फोटो कॉपी लगाने होता हैं। हर वर्ष 16 जत्थे (दल) तथा प्रत्येक जत्थे में 35 यात्रियों को यात्रा पर जाने की अनुमति होती है। अधिक आवेदन आने के कारण विदेश मंत्रालय द्वारा ड्रा (लॉटरी) सिस्टम अपनाया जाता है। चयनित व्यक्तियों को उनकी यात्रा तिथि से एक माह पूर्व सूचित कर दिया जाता है। यात्रा दिल्ली से शुरू होती है। इस यात्रा में लगभग एक लाख रुपए का खर्च आता है।

यात्रा की तैयारी करते समय खाने-पीने की चीजें और कपड़ों की उचित व्यवस्था रखें। खाने के सामान में सूखे मेवे स्नैक्स रखें। स्नैक्स ऐसे हों, जिन्हें खाने के बाद ज्यादा प्यास न लगे। ऊंनी कपड़े, बरसाती, शूज, धूप का चश्मा, सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर जरूर साथ रखें। यात्रियों को नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय में जाना होता है। इसके बाद यात्रियों को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के चिकित्सालय में जाना होता है। यहीं अंतिम रूप से यात्रा शुरू करने की अनुमति दी जाती है।