इंदौर. मप्र में 14 दिन लेट आए मानसून ने धमाकेदार दस्तक दी है। मानसून की पहली ही बारिश में कई जिले जलमग्न हो गए हैं। इंदौर में जहां मंगलवार को 4 घंटे तेज बारिश से सड़कें नाले में बदल गईं, वहीं देवास में कई नदियां उफान पर आ गईं, जिससे कई गांवों का संपर्क टूट गया। सिवनी में तेज बारिश के बाद बिजली गिरने से खेत में काम कर रहे पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन बुरी तरह से झुलस गए। वहीं महेश्वर में माहेश्वरी नदी के उफान पर आने से एक भैंस पानी में बह गई। मौसम विभाग के अनुसार मप्र में मानसून सक्रिय हो गया है। कुछ घंटों में कई जिलों में जोरदार बारिश हो सकती है।



सिवनी में बिजनी गरने से 5 की मौत, मृतकों में तीन बच्चे शामिल


सिवनी जिले के मोहगांव में मंगलवार को कुछ मजदूर मक्के की बुआई कर रहे थे। साथ आए बच्चे खेत के पास ही खेल रहे थे। बारिश शुरू होने से सभी लोग आम के पेड़ के नीचे खड़े हो गए। इसी दौरान आकाशीय बिजली गिरने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 लोग झुलस गए। जानकारी के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतका विनीता पिता राधेलाल सैयाम (16) सावित्री पिता जीवनलाल (14), जीजीबाई पति सुंदर जंघेला उम्र (34), प्रिंस पिता नेतम विश्वकर्मा (08) और प्रतीक्षा पिता नेतन विश्वकर्मा (06) को पीएम के लिए अपस्ताल भिजवाया। वहीं घायल माया बाई पति रिखीराम जंघेला (50) और गीता बाई परधान (50) और एक अन्य का इलाज चल रहा है।


सोनकच्छ में कालीसिंध नदी तो महेश्वर में माहेश्वरी नदी उफान पर


- मप्र में मानसून के बेहरबान होते ही मुसीबतों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। देवास जिले में सुबह से हो रही तेज बारिश से कालीसिंध नदी उफान पर आ गई है और छोटी पुलिया डूब गई है। लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार कर रहे हैं। वहीं गुनेरी नदी के रौद्र रूप धारण करने से ब्रिज पानी में डूब गया है, जिसके चलते बागली-चापड़ा मार्ग बंद हो गया है। महेश्वर में भी महेश्वरी नदी उफान पर है, जिसके चलते बाढ़ में फंसकर एक भैंस बह गई, जिसे लोगों ने बड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।


बीआरटीएस सहित कई चौराहे लबालब


मानसून की पहली ही बारिश में शहर की ज्यादातर सड़कें नाले की तरह नजर आईं। सत्यसाईं, विजय नगर, रसोमा, एमआर-9 सहित शहर के ज्यादातर चौराहों में घुटने तक पानी भर गया, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बीआरटीएस का ज्यादातर हिस्सा तो ऐसा प्रतीत हो रहा है, जैसे नहर हो। इसके अलावा एमजी रोड, जंजीरवाला रोड में भी घुटने तक पानी बहा।


घरों में घुसा पानी


बारिश का सबसे अधिक असर शहर के पश्चिमी क्षेत्र में देखा जा रहा है। यहां सुबह 8 बजे से ही मूसलाधार बारिश जारी है। तेज बारिश के चलते छत्रीबाग, राजमोहल्ला, नर्सिंह बाजार, बालदा काॅलोनी, जाेशी मोहल्ला, बियाबानी, कागदी पूरा, चंदन नगर, राज नगर, नगीन नगर आदि क्षेत्रों में स्थित निचले इलाकाें में पानी भर गया। पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं हाेने से इन क्षेत्रों में स्थित कई घरों में पानी भर गया।


मच्छी बाजार से गंगवाल तक हालत खराब


स्मार्ट सिटी के तहत नगर निगम द्वारा पिछले दिनों मच्छी बाजार से लेकर गंगवाल बस स्टैंड तक बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाए गए थे। मच्छी बाजार, कड़ावघाट, सिलावट पूरा, बियाबानी से लेकर गंगवाल बस स्टैंड तक मकानों का मलबा फैला हुआ है। जोरदार बारिश के चलते इन इलाकों की हालत खराब हो गई है और पूरे क्षेत्र में कीचड़ के साथ ही जलभराव हो गया है। सिलावटपूरा क्षेत्र में निगम द्वारा पाइप लाइन डालने का काम किया जा रहा है जिसके चलते लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में भी भारी परेशानी हो रही है।


प्रदेश में मानसून की जोरदार दस्तक, कुछ घंटों में कई जिलों में तेज बारिश की संभावना

- मप्र में मानसून के सक्रिय होने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश शुरू हो गई। प्रदेश के दक्षिण पश्चिमी हिस्सों में बारिश भी हुई है। मानसून ने इंदौर से प्रवेश किया है और इस समय अलीराजपुर, धार, झाबुआ, देवास, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर में पहुंचा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ घंटों में इंदौर, धार, झाबुआ, बड़वानी, आलीराजपुर सहित कई शहरों में तेज बारिश की संभावना है।


पहले ही दिन कई जिले हुए तर


- मानसून की आमद अरब सागर ब्रांच से प्रदेश में हुई है। प्रदेश में मानसून आने का तय समय 10 जून है। यह इससे 14 दिन बाद मप्र पहुंचा है। मानसून पहुंचने के पहले दिन ही खरगोन, बड़वानी, धार, अालीराजपुर समेत प्रदेश के कई शहर तर हो गए। अालीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, छिंदवाड़ा जिले के सौंसर, बालाघाट समेत कई शहरों में बारिश हुई।


गुजरात-महाराष्ट्र होते हुए मप्र पहुंचा मानसून


- शुक्ला के मुताबिक मानसून बहरावल, अहमदाबाद समेत गुजरात के दक्षिणी हिस्से से होता हुआ खंडवा पहुंचा। गुजरात के इस हिस्से में एवं कोंकण के उत्तरी भाग के बीच 2.1 से 5.8 किमी ऊपरी हवा में एक चक्रवात था। यह बहुत स्ट्रांग था। इस वजह से गुजरात, महाराष्ट्र एवं मप्र से सटे इलाकों में दो-तीन दिन तेज बारिश हो रही थी। इसी रास्ते से मानसून मप्र पहुंचा है।


36 में से 24 सब-डिवीजनों में कम या बहुत कम बारिश

सामान्य से तीन दिन पहले 29 मई को केरल से प्रवेश करने के बाद मानसून से दक्षिण में केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा में अच्छी बारिश हुई। हालांकि अब भी 23 जून की स्थिति में मानसूनी बारिश में 10 फीसदी की कमी है।



- देश के चार डिवीजनों में केवल दक्षिणी प्रायद्वीप में 29 % ज्यादा बारिश हुई है। देश के चार मौसम विभागों में पूर्व और पूर्वाेत्तर भारत में 29% और पश्चिमोत्तर भारत में 24% की कमी है।

- अगर 36 सब-डिवीजनों में देखें तो 24 सब-डिवीजनों में कम या बहुत कम बारिश हुई है। इसका मतलब कि 25 फीसदी से कम भूभाग में सामान्य या अधिक बारिश हुई है।



कैसे पता चलता है मानसून पहुंच गया

- हवा का रुख दक्षिण पश्चिमी होना चाहिए।

- जमीन से लेकर पांच किमी ऊपर तक ज्यादा नमी होना चाहिए।

- इन इलाकों का तापमान सामान्य से न्यूनतम 5 डिग्री कम होना चाहिए।

- आसपास के क्षेत्रों में 1 सेमी से ज्यादा बारिश होना चाहिए।



देश के उत्तर भारत में मानसून सक्रिय रहेगा


- मानसून आए हुए लगभग एक महीना होने को है, लेकिन अब तक देश के 25 फीसदी भूभाग में ही सामान्य या सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि मानसून के एक बार फिर सक्रिय होने से अगले सप्ताह मध्य और उत्तर भारत में बारिश के हालात बनेंगे। मौसम विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा है कि मानसून के आगे बढ़ने के लिए अब अनुकूल हालात हैं। 23 जून से यह आगे बढ़ने लगा है। रविवार को यह गुजरात के सौराष्ट्र, वेरावल और अहमदाबाद, महाराष्ट्र के अमरावती की ओर बढ़ा है।


8 साल में सिर्फ 2013 में ही तय समय पर आया

प्रदेश में मानसून आठ साल बाद इतनी देर से पहुंचा। पिछले साल भी यह तय समय से 12 दिन बाद 22 जून को आया था। इस दौरान एक बार 2013 में ही यह तय समय पर आ सका।


कब-कब पहुंचा मानसून



वर्ष कब पहुंचा वर्ष कब पहुंचा

2010 16 जून 2014 19 जून

2011 17 जून 2015 21 जून

2012 19 जून 2016 21 जून

2013 10 जून 2017 22 जून