वियना। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक उत्पादन बढ़ाएगा। माना जा रहा है कि शुक्रवार को हुई बैठक में सऊदी अरब कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान को इस मामले में सहयोग के लिए राजी कर लिया है। बैठक से एक दिन पहले तक ईरान इसके लिए तैयार नहीं था।


सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री खालिद अल-फलीह ने कहा कि उत्पादकों ने भारी बहुमत से रोजाना 10 लाख बैरल उत्पादन बढ़ाने की सिफाशि की है। उन्होंने कहा, "हम आपूर्ति की किल्लत रोकना चाहते हैं। हम वैसे हालात नहीं चाहते, जैसा 2007-08 में देखा गया था।"ओपेक देशों द्वारा कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाए जाने का सबसे बड़ा फायदा भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को होगा क्योंकि आपूर्ति बढ़ने के कारण कीमतें घटेंगी।


दरअसल अमेरिका, चीन और भारत ने ही ओपेक से उत्पादन बढ़ाने की अपील की थी, जिसके बाद उन्होंने इस मसले पर सहमति बनाने के लिए बैठक की। भारत, अमेरिका और चीन चाहते हैं कि कच्चे तेल के दाम कम हों और बाजार में आपूर्ति की दिक्कत न हो क्योंकि इसके कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है। दिक्कत यह है कि ओपेक को उत्पादन बढ़ाने को लेकर किसी फैसले तक पहुंचने के लिए सभी सदस्य देशों की रजामंदी जरूरी है। अब तक ईरान इसके लिए तैयार नहीं था, लेकिन शुक्रवार को उसकी तरफ से नरम रुख के संकेत मिले।


ओपेक की बैठक शुरू होने से पहले फलीह से मुलाकात के बाद ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान नामदार जंगानेह ने कहा, "हम कुछ कर रहे हैं।"ईरान की अहमियत इसलिएईरान ओपेक का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने के मामले में यह अब तक सबसे बड़ा रोड़ा रहा है। चूंकि ईरान अमेरिका का कट्टर विरोधी रहा है, लिहाजा उसने ओपेक के अन्य देशों से अपील की थी कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से उत्पादन बढ़ाने के लिए बनाए जा रहे दबाव को खारिज कर देना चाहिए।


ट्रंप से तल्खी की वजह


असल में इसी साल मई में ट्रंप ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए थे। तेल बाजार पर नजर रखने वालों को संदेह था कि अमेरिका की तरफ से उठाए गए कदम के नतीजे में ईरान 2018 के अंत तक कच्चे तेल के उत्पादन में करीब एक तिहाई कटौती करेगा। ईरान की तकलीफ यह है कि उसे लगता है कि उत्पादन बढ़ाने से उसे बहुत कम फायदा होगा, जबकि सबसे बड़े निर्यातक सऊदी अरब सबसे ज्यादा फायदे में रहेगा।


एक समय लगा कि नहीं बन पाएगी बात


इससे पहले ईरान के पेट्रोलियम मंत्री ओपेक की बैठक छोड़कर बाहर चले गए थे क्योंकि सऊदी अरब कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा था। इस वजह से ईरान के साथ उसकी तनातनी बढ़ गई थी। ओपेक बैठक की पूर्व संध्या पर मंत्रियों के समूह ने तेल उत्पादन बढ़ाने को लेकर चर्चा की थी।


इसके बाद ईरान के पेट्रोलियम मंत्री बिजान नामदार जंगानेह ने संवाददाताओं से कहा, "मुझे नहीं लगता है कि हम किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं।"इस वार्ता को ओपेक बैठक की तैयारी के रूप में देखा जा रहा था। 14 सदस्यों वाले इस संगठन के ज्यादातर देश कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाना चाहते हैं। जनवरी, 2017 से ही ओपेक देशों में उत्पादन कटौती जारी है, लेकिन अब सऊदी अरब ने कच्चे तेल की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए उत्पादन बढ़ाने की वकालत की है।