मेहनत से हम अपनी एक-एक चीज को बंटोरते हैं और उसे कोई चोरी कर ले तो बहुत दुख होता है। आजकल बढ़ती चोरियों हर किसी के लिए सिरदर्द बन गई हैं। घर या दुकान पर चोरी होने से ना केवल आर्थिक नुकासान होता है बल्कि हताशा भी होती है। लेकिन क्या जानते हैं कि चोरी होने के पीछे कुछ हद तक आपके घर या फिर दुकान का वास्तु भी जिम्मेदार होता है…

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या फिर दुकान में आप अपनी किमती चीजें, गहनें, कागज, पैसे आदि को उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण में ना रखें। इससे चोरी होने की आशंका बनी रहती है।

उत्तर और पश्चिम दिशा के मध्य के कोणीय स्थान को वायव्य दिशा का नाम दिया गया है। इस दिशा का मुख्य तत्व वायु है।

कभी भी दुकान का कचरा साफ करते समय कचरा सड़क पर ना ड़ालें और ना ही किसी दुकान की ओर डालें। इससे दुकान में बरकत नहीं हो पाती। उसे अपनी दुकान के दक्षिण-पश्चिम की दिशा में रखे डस्टबिन में रखें और नगर निगम के कूड़े के क्षेत्र में ही डालें। इससे चोरी होने का भी भय नहीं रहता।

घर और दुकान में आप जहां भी पैसे रखते हैं, वहां पानी या फिर पानी से संबंधित कोई भी वस्तु ना रखें। इससे आपका पैसा पानी की तरह बह जाता है। इसे स्थिर करने के लिए पैसों के पास पानी ना रखें। वहीं घर या दुकान का मेन गेट बाकी सभी दरवाजों से बड़ा होना चाहिए।

अगर आपके घर या दुकान में एक ही लाइन में तीन दरवाजे लगे हैं तो ऐसी जगह चोरी होने की आशंका रहती है। अगर ऐसा है तो आप हर दरवाजे पर लाल धागे में बंधा क्रिस्टल टांग दें। ऐसा करने से घर या दुकान चोरी होने का डर खत्म हो जाता है और सकारात्मक ऊर्जा आ जाती है।

अगर आपके घर और दुकान के आसपास काफी चोरियां हो रही हैं और इससे आपको भय लग रहा है तो आप अपनी घर या दुकान की चौखट के पास पूजा करके मंगल यंत्र स्थापित करें। इससे ना सिर्फ आपका भय खत्म होगा बल्कि आपकी यहां चोरी भी नहीं होगी।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, पैसों को हमेशा दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखें, इससे चोरी होने का भय खत्म हो जाता है। ध्यान रहें, इस दिशा में जब आप पैसे रख रहे हों तो कोई भी खिड़की-दरवाजे ना हों। यदि आपके घर या दुकान का नौकर दक्षिण-पश्चिम दिशा में रहता है तो यह आपके लिए सही नहीं है। इस दिशा में रहने से नौकर में चोरी की भावना आ सकती है।