भोपाल। अपने सबसे मजबूत गढ़ मालवा में कांग्रेस की सेंधमारी की कोशिशें सत्तारूढ़ भाजपा को बेचैन कर रही है। अंचल के भाजपा नेताओं को लगने लगा हैं कि समय रहते मालवा को नहीं साधा गया तो मामला बिगड़ भी सकता है। भाजपा की चिंता की वजह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मंदसौर में हुई सभा में जुटी भीड़ और कुछ माह पूर्व हुए नगरीय निकाय चुनावों में कांग्रेस को मिली कामयाबी को माना जा रहा है।


मालवा भूमि कांग्रेस के लिए ज्यादा उपजाऊ नहीं मानी जाती है। इसे आएसएस की प्रयोगशाला मना जाता रहा है। पार्टी के बड़े-बड़े दिग्गज नेता इस इलाके से निकले हैं। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे से लगाकर तीन पूर्व मुख्यमंत्री सर्वश्री सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, वीरेन्द्र कुमार सखलेचा, पूर्व अध्यक्षों की बात करें तो डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डे, विक्रम वर्मा, सत्यनारायण जटिया मालवा की ही देन हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में मालवा की सभी सीटों पर भाजपा का परचम लहराया था। बाद में झाबुआरतलाम संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने यह सीट भाजपा से छीनकर जैसे-तैसे अपनी नाक बचा ली थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में तो मालवा ने भाजपा को छप्पर फाड़ सीटें देकर कांग्रेस का लगभग सूपड़ा साफ कर दिया था।


अंचल की 55 में से 48 सीटों पर भाजपा का परचम लहराया था और कांग्रेस को मात्र चार सीटों पर संतोष करना पड़ा था। तब भाजपा और कांग्रेस के बीच वोटों का फासला भी अच्छा खासा था। भाजपा को 49.71 और कांग्रेस को 38.98 फीसदी वोट मिले थे। यानी लगभग 11 फीसदी का अंतर था। इतने जर्बदस्त प्रदर्शन के बाद इस बार यदि यहां के भाजपा नेता डरे हुए हैं तो कुछ वजह तो होगी। राजनीतिक तौर पर चैतन्य माने जाने वाले इस मालवा को सत्ता में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिल पाना इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। पार्टी को 48 विधायक देने वाले इस अंचल से शिवराज सरकार में महज दो मंत्री है। ये हैं ऊर्जा मंत्री पारस जैन और स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक जोशी।


इंदौर, मंदसौर, रतलाम, नीमच, शाजापुर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर जिलों से सरकार में प्रतिनिधित्व नगण्य है। मंदसौर नीमच, रतलाम वे जिले हैं जहां किसान आंदोलन ने पिछले साल सरकार की किरकिरी कराई थी। इस साल राहुल गांधी की सभा में उमड़ी भीड़ भी इसी इलाके की थी। जबकि धार झाबुआ आलीराजपुर में आदिवासी संगठन जयस सरकार की नींद उड़ाए हुए हैं।


पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले दिनों अपने मप्र दौरे के दौरान क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने और आदिवासी वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाने के निर्देश सत्ता और संगठन को दिए थे। उसी पर अमल करते हुए 23 जून को मालवा के मुख्य केन्द्र इंदौर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम के जरिए कांग्रेस को जवाब देने की तैयारियां भी जोर-शोर से जारी हैं। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम हालांकि सरकारी है, लेकिन इसमें पूरे मालवा अंचल से लोगों को बुलाया जा रहा है। इसके तत्काल बाद राजनीतिक और सरकारी स्तर पर भी मालवा को तवज्जो दिए जाने की रणनीति बनी है।