लिंग परिवर्तन करके किसी पुरुष को मां बनने योग्य बना पाना आज के जमाने में भी चिकित्सा विज्ञान के लिए आसान नहीं है। लेकिन पुराणों में कई ऐसी अजब-गजब कथाएं हैं जिनमें पुरुष ने स्त्री बनकर बच्चे को जन्म दिया। इस अंक में आपको ऐसी ही एक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें एक पुरुष ने स्त्री बनकर दो बच्चों को जन्म दिया। ये दोनों बच्चे बड़े होकर रामायण के प्रमुख पात्र बने। इन्हीं के सहयोग से भगवान श्रीराम ने देवी सीता की खोज की और रावण पर विजय हासिल की।

रामायण में आपने दो बलशाली वानरों बाली और सुग्रीव का नाम पढ़ा और सुना होगा। दोनों महावीर थे और साथ मिलकर किष्किंधा नगरी पर शासन करते थे। इनके पिता के विषय में कहा जाता है कि बालि के पिता देवराज इंद्र थे जबकि सुग्रीव के पिता सूर्यदेव थे। लेकिन इनकी माता एक थी। इनकी माता के बारे में कथा है कि वह पुरुष से स्त्री बनी थी। इसके पीछे एक बड़ी ही रोचक कहानी है।

ऋक्षराज नामक एक शक्तिशाली नर वानर था जो ऋष्यमूक पर्वत पर रहता था। अपने बल के अहंकार में वह खूब उदंडता किया करता था। एक दिन उदंडता करते हुए वह एक तालाब में कूद गया। ऋक्षराज को पता नहीं था कि उस तलाब को शाप है कि जो भी नर उसमें डुबकी लगाएगा वह सुंदर स्त्री बन जाएगी। ऋक्षराज जब तालाब से निकले तो स्त्री बन चुके थे और अपने स्त्री रूप को देखकर असहज महसूस कर रहे थे।

ऋक्षराज अभी अपने रूप को लेकर उलझन में ही थे कि उस बीच देवराज इंद्र की नजर उन पर गई और वह पुरुष से स्त्री बनी ऋक्षराज के अनुपम सौंदर्य को देखकर कामाशक्त हो गए और इनके संबंध से एक बालक का जन्म हुआ जो बाली कहलाया।

देवराज इंद्र की तरह सूर्य ने भी जब स्त्री बनी ऋक्षराज को देखा तो मोहित हो गए। ऋक्षराज के साथ इनके संबध से एक बालक का जन्म हुआ जो सुंदर ग्रीवा वाला होने के कारण सुग्रीव कहलाया।

ऋषराज वानर से स्त्री बनी उस महिला ने ऋष्यमूक पर्वत पर रहकर ही इंद्र और सूर्यदेव से उत्पन्न अपने पुत्रों बाली और सुग्रीव का पालन-पोषण किया। दोनों भाइयों में खूब स्नेह था लेकिन एक ऐसी घटना हुई जिससे दोनों भाइयों में वैर हो गया और वे एक दूसरे के जान के दुश्मन बन गए।

बाली ने सुग्रीव को राज्य से भगा दिया और उसकी पत्नी पर अधिकार कर लिया। इससे सुग्रीव बहुत दुखी था और बाली से बदला लेना चाहता था। इसी बीच श्रीराम से सुग्रीव की मित्रता हो गई और इनकी मदद से सुग्रीव बाली से बदला लेने में सफल हुआ। बाली श्रीराम के हाथों मारा गया और सुग्रीव को किष्किंधा का राज्य और पत्नी वापस मिल गई।