रायपुर। वर्षों बाद पड़े दो ज्येष्ठ माह में इन दिनों बीच के एक माह को पुरुषोत्तम मास के रूप में मनाया जा रहा है। चूंकि पुरुषोत्तम मास को पुण्य फलदायी मास कहा जाता है इसलिए श्रद्धालु भक्तिभाव में डूबे हैं। एक ओर श्रीमद्भागवत कथा के आयोजनों में भगवान के विविध प्रसंगों को सुनने के लिए भीड़ उमड़ रही है तो दूसरी ओर भंडारा में भोजन प्रसादी खिलाने और गरीबों को दान करके भक्त पुण्य फल कमाने में लगे हैं।


पवित्र पुरुषोत्तम मास के अब मात्र दो दिन बचे हैं। इस माह में विवाह जैसे संस्कार न करने की मनाही के चलते विवाह मुहूर्त नहीं हैं। पुरुषोत्तम मास खत्म होते ही फिर विवाह मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। चातुर्मास लगने के पहले 16 मुहूर्तों में फेरे लिए जा सकेंगे।


एक मई से शुरू हुआ ज्येष्ठ महीना 28 जून तक रहेगा


हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल एक मई से ज्येष्ठ महीना शुरू हुआ जो 28 जून को समाप्त होगा। दो ज्येष्ठ महीने के शुरू के 15 दिन को साधारण ज्येष्ठ के रूप में मनाया गया। गत 16 मई से फिर पुरुषोत्तम माह की शुरुआत हुई जो 13 जून तक मनाया जाएगा। इसके बाद फिर आखिरी के 15 दिन यानी 14 जून से 28 जून तक साधारण ज्येष्ठ महीना मनाया जाएगा।


देवशयनी से देवउठनी तक नहीं होंगे शुभ संस्कार


13 जून को पुरुषोत्तम मास खत्म होने के पश्चात जून माह में विवाह के लिए नौ मुहूर्त और जुलाई में सात मुहूर्तं श्रेष्ठ हैं। जुलाई में 23 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि अर्थात देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। मान्यता है कि देवशयनी से लेकर दिवाली के बाद देवउठनी एकादशी तक की अवधि देवगणों के विश्राम करने की होती है। इस दौरान विवाह जैसे शुभ संस्कार नहीं किए जाएंगे।


चातुर्मास के पहले विवाह के शुभ मुहूर्त


जून - 17, 18, 19, 20, 21, 22,25,27,23


जुलाई- 2,3,5,6,10,11,15