भोपाल। राज्य सरकार लहसुन और प्याज की फसल को भावांतर भुगतान योजना से बाहर कर सकती है। वित्त विभाग ने लहसुन और प्याज पर योजना के तहत 400 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने के फैसले पर ऐतराज जताया है।


सूत्रों के मुताबिक वित्त विभाग का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न की जाए और एक नई योजना बनाकर किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा सकती है। वित्त विभाग के ऐतराज के बाद उद्यानिकी विभाग ने नया प्रस्ताव तैयार किया है।


विभाग ने प्रस्ताव दिया है कि प्याज और लहसुन को भावांतर भुगतान योजना से बाहर निकालकर एक कृषक समृद्धि योजना बनाई जाए। इस योजना के तहत किसानों को प्याज और लहसुन पर सरकार की तरफ से 800 रुपए प्रति क्विंटल का लाभ दिया जा सकता है।


दरअसल, उद्यानिकी विभाग ने मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भावांतर भुगतान योजना के तहत प्याज और लहसुन पर किसानों को 400 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि देने के लिए वित्त विभाग से मंजूरी मांगी थी।


इस पर वित्त विभाग ने कहा कि यदि किसानों को प्रोत्साहन राशि देना ही है तो भावांतर भुगतान की योजना की मंशा के साथ छेड़छाड़ न हो। इससे बेहतर है कि दोनों फसलों को भावांतर से बाहर निकालकर अलग योजना बनाई जाए। वित्त विभाग की सलाह के बाद उद्यानिकी विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा गया है।


भावांतर में पंजीकृत किसानों को मिलेगा लाभ


सूत्रों के मुताबिक नए प्रस्ताव के तहत जिन किसानों ने लहसुन और प्याज बेचने के लिए भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन कराया था, उन सभी को इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।


पहले यह था प्रस्ताव


राज्य सरकार ने योजना के तहत प्याज और लहसुन का समर्थन मूल्य 8 रुपए प्रति किलो तय कर किसानों को अधिकतम 4 रुपए प्रति किलो भावांतर देने का फैसला किया था, लेकिन बाजार में किसानों की फसलों को समर्थन मूल्य से बेहद कम दरों पर खरीदा गया।


इससे सरकार द्वारा भावांतर देने के बाद भी समर्थन मूल्य के बराबर किसानों को कीमत नहीं मिल पा रही थी। इससे किसान नाराज थे। किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए 27 मई को मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि सरकार किसानों को 400 रुपए प्रति क्विंटल भावांतर के साथ 400 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि अलग से देगी।