छत्तीसगढ़ प्रदेश के सर्व आदिवासी समाज ने 20 सीटों पर अलग से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. इस घोषणा के बाद दोनों प्रमुख पार्टियों में आदिवासियों को साधने के लिए जोर आजमाइश शुरू हो गई है. छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को करीब 6 माह बचे हैं. इस बीच बीजेपी और कांग्रेस से मुंह मोड़ते हुए प्रदेश के आदिवासियों ने 20 सीटों पर अलग से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. ऐसे में आदिवासी समाज के इस घोषणा के बाद बीजेपी और कांग्रेस की राजनीतिक गणित जरूर बिगड़ सकती है. वहीं कांग्रेस इसे नई बात नहीं मानती और अपने प्राप्त सीटों पर संतुष्ट दिख रही है.


मामले में पीसीसी मीडिया प्रभारी शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा कि आदिवासी सीटों को लेकर राजनीति का दौर चल रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बस्तर और सरगुजा में पहले से बढ़त मिली हुई है. कांग्रेस बस इन्हीं सीटों की संख्या को बढ़ाने में लगी है. उन्होंने कहा कि कोरिया और जशपुर जिले के भी आदिवासी सीटें कांग्रेस के निशाने पर हैं. ऐसे में सर्व आदिवासी समाज द्वारा अपना प्रत्याशी खड़ा करना कोई नई बात नहीं है.


वहीं बीजेपी को प्रदेश में हुए विकास पर पूरा भरोसा है. उन्हें उम्मीद है कि आदिवासी सीटों पर भले ही बीजेपी बीते चुनाव में अपने प्रत्याशियों को जीत नहीं दिला पाई थी, लेकिन आदिवासियों का साथ मिलने का दावा जरूर कर रही है.


साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच हार जीत का अंतर काफी कम था. बस्तर और सरगुजा के आदिवासी सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था. जशपुर की 3 और रायगढ़ की 2 सीटों पर अगर कांग्रेस सेंधमारी करने में सफल होती है तो सत्ता पर कांग्रेस का राज हो सकता है. बहरहाल, सर्व आदिवासी समाज के ऐलान ने दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं के माथे पर बल ला दिया है.