छत्तीसगढ़ में सूरजपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में शादी का सीजन शुरू होते ही जिले में बाल विवाह का सिलसिला भी शुरू हो गया है. शासन के बाल सरंक्षण विभाग द्वारा बाल विवाह रोकने के अभियान और जागरूक करने के दावे की भी पोल खुल गई है. बता दें कि बीते जनवरी माह साल 2018 से लेकर मई महीने तक अब तक 115 बाल विवाह रोकने का विभाग दावा कर रहा है.


शासन द्वारा हर साल जागरूकता अभियान के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसका असर सूरजपुर जिले में बिलकुल भी देखने को नहीं मिल रहा है. शायद यही वजह है कि आज आधुनिकता के दौर में भी बाल विवाह जैसा अभिशाप हमारे समाज से खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. वैवाहिक सीजन में कई बाल विवाह करा दिए जाते है, तो जिनकी जानकारी बाल सरंक्षण विभाग तक पहुंचता है उसी पर कार्रवाई की जाती है. जिले के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का मानना है कि जहां ग्रामीणों में शिक्षा का अभाव है वहीं जिला प्रशासन के ग्रामीणों को जागरूक करने का अभाव ही बाल विवाह का प्रमुख कारण है.


जिले के ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह एक अभिशाप बना हुआ है. वहीं बाल सरंक्षण विभाग के अधिकारी जल्द ही ग्रामीणों मे जागरूकता फैलाने और बाल विवाह की कुरीति को जड़ से खत्म करने का दावे करते नजर आए. साथ ही पिछले 5 माह में 115 बाल विवाह रुकवाने को अपनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने की बात कही है.


आज भी हमारे समाज में बाल विवाह जैसी कुरीतियां समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधा है. ऐसे में शासन प्रशासन ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए कितनी गंभीरता से अभियान संचालित करती है यह तो देखने वाली बात होगी.