केरल में फैले निपाह वायरस का खतरा अब छत्तीसगढ़ में भी दिखाई दे रहा है. प्रदेश के महासमुंद जिले के एक स्कूल में सैकड़ों की संख्या में चमगादड़ों ने सालों से अपना बसेरा बनाया है. लिहाजा पहले तो लोगों में यह कौतुहल का विषय था, लेकिन अब यह चिंता का विषय बन चुका है. चमगादड़ों से फैलने वाले निपाह वायरस का खतरा यहां पढ़ने वाले बच्चों और शिक्षकों पर मंडरा रहा है.


जिले के बागबाहरा विकास खण्ड के ग्राम पंचायत ओंकारबंद के आदिवासी बाहूल गांव तेलीबांधा में शिक्षा के लिए एक मात्र स्कूल प्राथमिक स्कूल है. इस स्कूल में 53 बच्चे पढ़ रहे हैं जिन पर निपाह का खतरा मंडरा रहा है. स्कूल में 50 साल पुराना खपरैल का बना मुख्य हॉल है, जहां चमगादड़ों ने अपना डेरा जमाया हुआ है. चमगादड़ों का यह डेरा बच्चों और शिक्षकों के परिजनों के लिए चिंता का विषय बन चुका है. कई सालों से शिक्षक बच्चों को इसी स्कूल में चमगादड़ों के बीच पढ़ाने के लिए मजबूर है.


स्कूल के प्रधान पाठक और ग्राम पंचायत की माने तो ऐसा कोई साल नहीं है जब चमगादड़ों की समस्या से निजात दिलाने के लिए शाला की छत को खपरैल से स्लैब छत बनाने के लिए अधिकारियों से मांग की गई हो, लेकिन सिर्फ आश्वासन देकर भूल जाते हैं. जिला शिक्षा अधिकारी, जनदर्शन, लोक सुराज से लेकर शिक्षा मंत्री तक को इस समस्या के बारे में अवगत कराया जा चुका है, लेकिन किसी ने कोई फरियाद नहीं सुनी.