भोपाल। नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस समेत कुछ शताब्दी-राजधानी ट्रेनों में आपके प्लेट से कुछ डिश कम होने वाली हैं। खाने की क्वालिटी सुधारने के नाम इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) यह काम करने जा रहा है।


कॉरपोरेशन ने सूप, सैंडविच, ब्रेडस्टिक और बटर कम करने का प्रस्ताव तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेजा है। इसे मंजूरी मिलते ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा। पहले यह व्यवस्था कुछ राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में लागू होगी। इसके बाद दूसरे ट्रेनोें में इसे अमल में लाया जाएगा।


आईआरसीटीसी के एक अफसर ने बताया कि जिस तेजी से खान-पान के चीजों के रेट बढ़े हैं, उस लिहाज से ट्रेनों में कैटरिंग के रेट नहीं बढ़े हैं। इस वजह से खान-पान की चीजों की मात्रा भले ही ज्यादा हो पर गुणवत्ता बनाए रखने में मुश्किल हो रही है। लिहाजा आई आईआरसीटीसी का जोर अब मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता पर रहेगा। मौजूदा दरों पर ही अच्छी क्वालिटी सामग्री दी जाएगी।


बता देें कि नई दिल्ली-भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस में खान-पान की चीजों की गुणवत्ता को लेकर कई शिकायतें आ चुके हैं। तीन साल पहले चावल में इल्ली मिलने की शिकायत आई थी। शताब्दी में खान-पान की गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सभी मंडलों से उत्तर रेलवे को भेजी जाती है। साल भर के भीतर करीब शिकायतों का आकड़ा 20 से 50 के बीच रहता है। कैटरिंग संचालक पर हर साल बड़ा जुर्माना भी चुकाना पड़ता है। हर केस में औसतन 2 हजार से 5 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जाता है।

यह है हकीकत


सूत्रों के मुताबिक शताब्दी-राजधानी ट्रेनों में कैटरिंग में आरसीटीसी को मौजूदा रेट में करीब 20 फीसदी का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई के लिए आईआरसीटीसी ने खान-पान के सामानों के दाम बढ़ाने की जगह आईआरसीटीसी ने यह तरीका निकाला है। हालांकि, आईआरसीटीसी के अफसरों का तर्क है कि इससे गुणवत्ता सुधरेगी, प्लेट का वजन कम होगा। साथ ही चीजें बेकार भी नहीं जाएंगी।


प्रस्ताव भेजा है


कुछ शताब्दी-राजधानी ट्रेनों में कैटरिंग आईटम कम करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा है। इसमें भोपाल शताब्दी एक्सप्रेस भी शामिल है। 


 सिद्धार्थ सिंह जन संपर्क अधिकारी, आईआरसीटीसी