क्या आपको पता है कि मलमास के दौरान सभी देवी-देवता कहां निवास करते हैं? आश्चर्य मत करिए, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सभी देव शक्तियां मलमास के दौरान पृथ्वी पर ही निवास करती हैं। उनके निवास की पावन जगह है बिहार राज्य का राजगीर। इस बार 16 मई से शुरू हुआ था मलमास और 13 जून तक रहनेवाला है। तो आप यहां आकर सभी देवों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त कर सकते हैं… राजगीर एक हिल स्टेशन भी है इसलिए गर्मी के मौसम में आपको यहां घूमने में दिक्कत भी नहीं आएगी। राजगीर पटना से 100 किमी दक्षिन-पूर्व में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसा है। आइए जानते हैं, राजगीर और यहां के महत्व के बारे में…

राजगीर का ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों ही महत्व है। यह कभी मगध साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी, इसी के बाद मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। राजगीर में भगवान विष्णु की शालीग्राम के रूप में पूजा की जाती है। यहां ब्रह्मकुंड व सप्तधाराओं में स्नान की विशेष महत्ता है। साथ ही यहां पर 22 कुंड और 52 धाराएं भी हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर के ब्रह्म कुंड परिसर में एक यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में राजा बसु ने सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया था और वे सभी यहां पर पधारे भी थे। लेकिन काले काग (कौआ) को निमंत्रण देना राजा बसु भूल गए। उसके बाद से मलमास मेले के दौरान राजगीर के आसपास काग महाराज कहीं दिखाई नहीं देते हैं।

राजगीर, महावीर स्वामी की प्रथम देशना स्थली भी रहा है। इस जगह का बौद्ध धर्म से काफी पुराना नाता रहा है। भगवान बुद्ध की यह साधना भूमि भी रही है। महात्मा बुद्ध न केवल यहां रुके थे बल्कि यहां से उन्होंने विश्व को कई उपदेश भी दिए थे। राजगीर का विवरण कई ग्रंथ, उपनिषद और वेद जैसे ऋगवेद, अथर्ववेद, तैत्तिरीय उपनिषद, वायु पुराण, महाभारत, वाल्मीकि रामायण आदि में आता है।

राजगीर एक खूबसूरत हिल स्टेशन भी है, आप यहां तपती गर्मियों से बचने के लिए घूमने भी आ सकते हैं। यह जगह ना सिर्फ धार्मिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है बल्कि यह एक सुन्दर हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में काफी लोकप्रिय है। इस जगह पर हिंदू, जैन, और बौद्ध तीनों धर्मों के कई धार्मिक स्थल हैं। बताया जाता है कि बुद्ध के उपदेशों को यहीं लिपिबद्ध किया गया गया था और पहली बौद्ध संगीति भी यहीं हुई थी।

राजगीर पहुंचकर आप विश्व शांति स्तूप, सोन भंडार, जरासंध का अखाड़ा, बिंबिसार की जेल, नौलखा मंदिर, जापानी मंदिर, बाबा सिद्धनाथ का मंदिर, जैन मंदिर आदि मंदिरों को दर्शन कर सकते हैं। यह एक आकर्षक स्थान है। यहां का अनुपम दृश्य देखने लायक है, जिससे मन को अपार शांति मिलती है।

बताया जाता है कि मलमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त महीना है। यह मलमास हर 32 महीने, 16 दिन और 8 घड़ी के अंतर के बाद ही आता है। मलमास से सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच संतुलन बनाया जाता है। सनातन मत की ज्योतिषीय गणना के अनुसार, तीन वर्ष में एक वर्ष 366 दिन का होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अतिरिक्त एक महीने को मलमास या अतिरिक्त मास कहा जाता है।