ब्रिटेन के हर 5 में से 1 वयस्क ने अपने पार्टनर को धोखा देने की बात स्वीकार की है जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि एक पति या एक पत्नी विवाह की धारणा बहुत से लोगों के लिए उतनी आसान नहीं है जितनी दूसरों के लिए। एक तरफ जहां कई स्टडीज में इस बात का खुलासा हुआ है कि हेट्रोसेक्शुअल रिलेशनशिप में महिलाओं की तुलना में पुरुषों द्वारा व्यभिचार करने यानी पार्टनर को धोखा देने की आशंका अधिक होती है, वहीं हाल में हुई एक रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि जब बात बेवफाई पर पार्टनर को माफ करने की आती है तो पुरुष ऐसा नहीं कर पाते और तुरंत तलाक ले लेते हैं। 

तलाक लेने की वजहों पर रिसर्च 

हॉल ब्राउन फैमिली लॉ ने व्यवहार संबंधी उन आदतों पर एक रिसर्च करवायी जिसकी वजह से तलाक होते हैं। इस रिसर्च के ज्ञानवर्धक नतीजे सामने आए हैं जो बताते हैं कि धोखा और बेवफाई भी शादीशुदा जिंदगी पर गहरा प्रभाव डालते हैं। रिसर्च के नतीजों के मुताबिक, करीब एक तिहाई तलाक इस वजह से होते हैं क्योंकि महिला और पुरुष दोनों एक दूसरे की पिछली गलतियों को तो माफ कर देते हैं लेकिन आखिरकार उनके सब्र का बांध टूट जाता है। बेवफाई, धोखा, आर्थिक समस्याएं और अपशब्दों का प्रयोग इस बुरे व्यवहार के प्रति जिम्मेदार होता है। 

पत्नी की बेवफाई सहन नहीं कर पाते पुरुष 

हॉल ब्राउन फैमिली लॉ की कानूनी सलाहकार एलेन वॉकर बताती हैं, 'पार्टनर की बेवफाई के बावजूद पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपनी टूटी शादी को बचाने के लिए ज्यादा कोशिशें करती हैं। कई बार हम आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि कैसे कुछ महिलाएं और पुरुष पार्टनर के गलत व्यवहार को आंख बंदकर पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं।' महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अपनी पत्नियों की बेवफाई को सहन करने की क्षमता बेहद कम होती है। 

बच्चों के लिए पार्टनर को देते हैं दूसरा मौका 

ऑफिस फॉर नैशनल स्टैटिस्टिक्स के अक्टूबर 2017 के डेटा के मुताबिक पार्टनर के दुर्व्यवहार की वजह से पति के खिलाफ तलाक की अपील करने वाली महिलाओं की संख्या 1996 के मुकाबले 43प्रतिशत हो गई है जबकि इसी वजह से पत्नियों को तलाक देने वाले पुरुषों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है। वॉकर की मानें तो बहुत सी महिलाएं और पुरुष कई परेशानियों के बाद भी अपनी शादी को दूसरा मौका सिर्फ इसलिए देते हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि उनकी टूटती शादी का नकारात्मक असर उनके बच्चों पर पड़े।