नई दिल्ली, मोदी सरकार और बीजेपी को घेरने के लिए विपक्षी पार्टियों ने कदम से कदम मिलाकर साथ चलने की रणनीति बनाई है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को मंदसौर में किसानों को संबोधित करने के साथ पार्टी के कैम्पेन की शुरुआत की. पार्टी की ओर से सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शनों का सिलसिला आगे भी लगातार जारी रहेगा.


आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक विपक्षी पार्टियों ने मुद्दों के आधार पर मोदी सरकार को घेरने का फैसला किया है. विपक्ष ने ये भी तय किया है कि बीजेपी नेताओं को व्यक्तिगत तौर पर निशाना नहीं बनाया जाएगा लेकिन जनता से जुड़े मुद्दों पर मोदी सरकार से हर मोर्चे पर जवाब मांगे जाएंगे.    


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता डी राजा ने इंडिया टुडे से कहा, “बीजेपी बहुत हताश है खास तौर पर उपचुनाव के नतीजे आने के बाद. उनके नेताओं के बयानों से ही पता चल जाता है कि वो कितने निराश हैं. हमें मुद्दों पर जवाब चाहिए?  कहां हैं विकास?  हम जवाब मांगने के साथ मोदी और उनकी सरकार की नाकामियों को उजागर करेंगे.”  


कांग्रेस की अगुआई में विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरने के लिए कुछ खास मुद्दों पर फोकस रखने का फैसला किया है. इनमें किसान संकट, बेरोजगारी और महिलाओं के उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ना शामिल हैं.  


राहुल गांधी ने किसानों की दिक्कतों को उठाने के साध मध्य प्रदेश के मंदसौर से कैम्पेन शुरू किया. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) 28 जून से मोदी सरकार के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगी. सीपीआई का 28 जून को देशभर में पेट्रोल के बढ़े दामों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है.  


बताया जा रहा है कि जिन विपक्षी दलों के नेताओं ने कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी के बेंगलुरु में शपथग्रहण समारोह में हिस्सा लिया था उन्होंने अनौपचारिक तौर पर विरोध अभियान की रणनीति बनाई है.


सूत्रों के मुताबिक विपक्षी पार्टियों ने फैसला किया है कि शुरुआत में वे सभी अपने अपने स्तर पर अभियान छेड़ेंगे. इसके बाद साझा कैम्पेन की रणनीति पर काम किया जाएगा. साझा कैम्पेन पर मंत्रणा के लिए विपक्षी पार्टियों के नेता इस महीने के आखिर में बैठक करेंगे.


विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दों को छेड़ने के लिए आम सहमति है. दिलचस्प ये है कि विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत तौर पर निशाना नहीं बनाने का फैसला किया है.


सीपीआई नेता डी राजा का इस बारे में कहना है- “हम निजी स्तर पर क्यों जाएं? हमारी चिंता लोगों की दिक्कतें दूर करना है. इस बात को लेकर आम सहमति है कि जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाया जाए, सरकार में बैठे लोगों से सवाल किए जाएं और उन्हें बेनकाब किया जाए.” डी राजा ने कहा, “अच्छे दिनों का क्या हुआ? मोदी ने बहुत सारे नारे दिए थे. उनके सारे वादों का क्या क्या हुआ? सब नारे ही बन कर रह गए.”   


संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष की रणनीति किसान संकट, बेरोजगारी बढ़ने, नौकरियां जाने, एससी/एसटी और महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ने जैसे मुद्दों पर बड़ा विरोध अभियान छेड़ने की है.